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योग निद्रा

योग निद्रा

योग निद्रा

योग निद्रा – परिचय

योग निद्रा जागने और सोने के बीच की अवस्था है । यह एक सचेत, गहरी विश्राम अवस्था है जो तनाव को कम करती है, नींद की गुणवत्ता में सुधार करती है, और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाती है। योग निद्रा को हम आरामदायक ढीले कपड़े पहन कर पांच चरणों में करते हैं :

पहला चरण

पहले चरण के लिए सबसे पहले सुनिश्चित कर लें कि अभ्यास के बीच किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक व्यवधान नहीं होने पाए। अब योगा मैट या हार्ड बेड पर पीठ के बल लेट जाएं। अगर आप चाहें तो कोई चादर या शाल ओढ़ सकते हैं । दोनों एड़ियों के बीच एक से डेढ़ फीट का अंतर बनाएं । दोनों हाथ शरीर के बगल में शरीर से 6 से 8 इंच की दूरी पर रखें । हथेलियों को आसमान की ओर खुला रखें। आंखें बंद करें, अपना ध्यान आती जाती सांसों पर केन्द्रित करें और शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें।

दुसरे चरण

दुसरे चरण के लिए अपने मन में कोई छोटा सा, सटीक और सकारात्मक इच्छा या संकल्प दोहराएं जैसे “मैं स्वस्थ हूं” , “मैं शांत हूं” , “मैं खुश हूं” , “मैं तनावमुक्त हूँ” या “मैं प्रभू की शरण में हूँ” आदि ।

तीसरे चरण

तीसरे चरण में अपना ध्यान शरीर के प्रत्येक अंग पर एक अंग से दूसरे अंग पर ले जाएं और उसे पूर्ण विश्राम अवस्था में मानसिक रूप से अनुभव करें ।

चौथे चरण

चौथे चरण में अपनी सामान्य श्वास प्रक्रिया को देखें। इसे नियंत्रित करने की कोशिश न करें।

पांचवें चरण

पांचवें चरण में बाहर आने के लिए धीरे-धीरे शरीर में हलचल शुरू करें, हाथों और पैरों को हल्का सा हिलाएं, धीरे से आँखें खोले और उठकर बैठ जाएं।

योग निद्रा के लाभ

  • योग निद्रा कोर्टिसोल अर्थात तनाव हार्मोन को कम करके चिंता और डिप्रेशन को दूर करती है।
  • अनिद्रा को दूर करने और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में अत्यधिक प्रभावी है।
  • शारीरिक और मानसिक थकान को मिटाकर शरीर को ऊर्जावान बनाती है।

अभ्यास का सर्वोत्तम समय

बैसे तो योग निद्रा कभी भी की जा सकती है, लेकिन सर्वोत्तम परिणामों के लिए:

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खाली पेट करें , या
  • दोपहर के भोजन के बाद करें जो गहरी नींद के बजाय ताजगी प्रदान करती है, या
  • रात को सोने से ठीक पहले करें जो अनिद्रा से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी है

विस्तृत अभ्यास विधि – कसाव व विश्राम

  • 01 योग निद्रा का अभ्यास करने के लिए ऊपर बताई पहले चरण की विधि के अनुसार आराम से शवासन में लेट जायें। दोनों हाथों की मुट्ठी बांधें, अंगूठा मुट्ठी के अन्दर रखें।
  • 02 गहरी सांस लेकर सांस रोक कर रखें। मुट्ठी को कसें, पूरे हाथ को कसाव दें, पैरों को कसाव दें, कमर को कसाव दें, पूरे धड़ को कसाव दें, गर्दन को कसाव दें, चेहरे को कसाव दें, पूरे शरीर को कसाव दें, खूब कसाव दें, अधिक से अधिक कसाव दें।
  • 03 सांस छोड़ते हुए पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। शरीर में हुए परिवर्तन को महसूस करें।
  • 04 अब गहरी सांस लेकर दाहिने हाथ की मुट्ठी बांधें, दाहिनी मुट्ठी कसें, दाहिने हाथ को कसाव दें, दाहिने पैर को कसाव दें, अच्छे से अधिक से अधिक कसाव देकर ढीला छोड़ दें।
  • 05 एक बार फिर गहरी सांस लेकर बायें हाथ की मुट्ठी बांधें, कसाव दें, बायें हाथ को कसाव दें, बायें पैर को कसाव दें, खूब कसाव देकर ढीला छोड़ दें।
  • 06 गहरी सांस लेकर रोकें, पूरे शरीर को कसाव दें, और कसाव दें……. और कसाव दें…………………..। सांस छोड़ते हुए पूरा शरीर एकदम ढीला छोड़ दें। आराम से लेटे-लेटे शरीर में आए परिवर्तन को महसूस करें।
  • 07 अपना संकल्प धीरे-धीरे तीन बार दोहराएं।
  • 08 सांस छोड़ते हुए शरीर को पूर्ण विश्राम की स्थिति में जाने दें।

शरीर के प्रति चेतना

अपनी चेतन आत्मा से अपने शरीर को देखने का प्रयास करें शरीर जो भी स्थिति दर्शाना चाहता हो उसे समझने का प्रयास करें लेकिन बिशेष प्रयास न करें, जिस प्रकार अपना काम करते करते कुछ संगीत आदि सुन लेते हैं बस उसी प्रकार समझें ।

दाहिने भाग का अवलोकन

शरीर के विभिन्न अंगों के नाम के साथ साथ अपना ध्यान बहां ले जायें और उन्हें सुनें । एक एक करके इन्हें हल्के से हिलाएं और सुनें – दाहिने हाथ का अंगूठा, दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली, दाहिने हाथ की मध्यमा ऊंगली, दाहिने हाथ की अनामिका ऊंगली, दाहिने हाथ की कनिष्ठा ऊंगली, दाहिनी हथेली, दाहिनी हथेली का पीछे का भाग , दाहिने हाथ का आगे का हिस्सा, दाहिने हाथ के पीछे का हिस्सा, दाहिनी भुजा, पीठ का दाहिना हिस्सा, कमर का दाहिना हिस्सा, दाहिना नितम्ब, दाहिनी जांघ, दाहिना पैर, दाहिने पैर का पंजा और तलवा, दाहिने पैर का अंगूठा, दाहिने पैर की दूसरी उंगली, तीसरी उंगली, चौथी उंगली, दाहिने पैर की छोटी उंगली, पूरा दाहिना पैर ।

बाएं भाग का अवलोकन

बाएं हाथ का अंगूठा, बाएं हाथ की तर्जनी ऊंगली, बाएं हाथ की मध्यमा ऊंगली, बाएं हाथ की अनामिका ऊंगली, बाएं हाथ की कनिष्ठा ऊंगली, बाईं हथेली, बाईं हथेली का पीछे का भाग, बाएं हाथ का आगे का हिस्सा, बाएं हाथ के पीछे का हिस्सा, बाईं भुजा, पीठ का बायां हिस्सा, कमर का बायां हिस्सा, बायां नितम्ब, बाईं जांघ, बायां पैर, बाएं पैर का पंजा और तलवा, बाएं पैर का अंगूठा, बाएं पैर की दूसरी उंगली , तीसरी उंगली, चौथी उंगली, बाएं पैर की छोटी उंगली, पूरा बायां पैर ।

सर, चेहरा व धड़ का अवलोकन

गहरी सांस लें और छोड़े , थोड़ा विश्राम,………………….. सर पर ध्यान ले जायें – सर , माथा , दाहिनी भोंह, दाहिनी आंख, दाहिना कान, दाहिनी नासिका, दाहिना गाल, दाहिने गाल के अन्दर का हिस्सा,

बायां सर, बायां माथा, बायीं भोंह, बायीं आंख, बायां कान, बायीं नासिका, बायां गाल, बायें गाल के अन्दर का हिस्सा, जीभ, जबड़े, दांत, ऊपर का ओंठ, निचला ओंठ,

ध्यान गर्दन पर, छाती का मध्य भाग, फेफड़े, ह्रदय, डायफ्राम, यकृत, पेट, नाभी, नाभी के नीचे का हिस्सा,

थोड़ा विश्राम,…………………..
और अब ध्यान शरीर और ज़मीन के संपर्क बिंदुओं पर ले जायें – एड़ी और ज़मीन, पिडली और ज़मीन, जंघा और ज़मीन, पीठ और ज़मीन, रीढ़ की हड्डी और ज़मीन, सर का पिछला हिस्सा और ज़मीन – जहां जहां शरीर ज़मीन को स्पर्श कर रहा है , वहां वहां अपना ध्यान दें – विश्राम करते हुए गहरी विश्रांति का अनुभव करें और मन में विचार करें कि पूरा शरीर पृथ्वी तत्व से बना है और पृथ्वी में ही विलीन हो जाएगा, आत्मा अमर है अमर ही रहेगी ।

समापन

मन ही मन तीन बार अपन संकल्प दोहराएं

समस्त प्राणियों के लिए मंगल कामना करें

सर्वे भवन्तु सुखिना , सर्वे सन्तु निरामया,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कच्चित दुःख भाग भवेत्
ओं शांति शांति शांतिः

धीरे से किसी भी तरफ करवट लेकर उठ कर बैठे और धीरे धीरे आँखें खोले ।

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