शरीर को योगाभ्यास के लिए तैयार करते हैं
रात्रि विश्राम अथवा लंबे समय तक बैठे रहने के कारण शरीर की मांसपेशियाँ एवं जोड़ कुछ कठोर हो जाते हैं। हल्के व्यायाम शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करते हैं और योगासन के लिए तैयार करते हैं।
योग केवल शरीर को मोड़ने या खींचने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और प्राण को संतुलित करने वाली एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक साधना है। योगासन का पूर्ण लाभ तभी प्राप्त होता है जब शरीर इसके लिए उचित रूप से तैयार हो। इसलिए योगाभ्यास प्रारम्भ करने से पहले 5–15 मिनट तक हल्के व्यायाम (Warm-up Exercises अथवा सूक्ष्म व्यायाम) करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
रात्रि विश्राम अथवा लंबे समय तक बैठे रहने के कारण शरीर की मांसपेशियाँ एवं जोड़ कुछ कठोर हो जाते हैं। हल्के व्यायाम शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करते हैं और योगासन के लिए तैयार करते हैं।
गर्दन, कंधे, रीढ़, कमर, घुटने तथा टखनों के हल्के संचालन से उनकी जकड़न कम होती है और शरीर अधिक सहजता से आसनों का अभ्यास कर पाता है।
वार्म-अप करने से हृदय की गति धीरे-धीरे बढ़ती है तथा शरीर के सभी अंगों में रक्त एवं ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। इससे शरीर ऊर्जावान एवं सक्रिय महसूस करता है।
यदि बिना तैयारी के कठिन योगासन किए जायें तो मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट की चोट या जोड़ों में दर्द हो सकता है। हल्के व्यायाम शरीर को सुरक्षित रूप से योगाभ्यास के लिए तैयार करते हैं।
वार्म-अप के दौरान गहरी एवं नियंत्रित श्वास लेने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने लगती है। इससे आगे किए जाने वाले प्राणायाम एवं योगासन अधिक प्रभावी बनते हैं।
हल्के व्यायाम मस्तिष्क एवं मांसपेशियों के बीच समन्वय (Coordination) को बेहतर बनाते हैं, जिससे शरीर का संतुलन एवं नियंत्रण बढ़ता है।
योग का उद्देश्य केवल शरीर का व्यायाम नहीं, बल्कि मन को भी शांत एवं केंद्रित करना है। वार्म-अप के दौरान किया गया सचेत श्वसन मन को वर्तमान क्षण में लाता है और योगाभ्यास के लिए मानसिक तैयारी करता है।
जब शरीर पहले से गर्म एवं लचीला होता है, तब प्रत्येक योगासन अधिक सहजता, स्थिरता एवं सही मुद्रा के साथ किया जा सकता है। इससे योग के लाभ भी अधिक प्राप्त होते हैं।
तैयार शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे योगाभ्यास के दौरान जल्दी थकान नहीं होती और अभ्यास अधिक आनंददायक बन जाता है।
बच्चों, युवाओं, वृद्धों तथा लंबे समय से निष्क्रिय जीवनशैली अपनाने वाले व्यक्तियों के लिए हल्के व्यायाम विशेष रूप से आवश्यक हैं, क्योंकि उनका शरीर धीरे-धीरे अभ्यास के लिए तैयार होता है।
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात दोष बढ़ने पर जकड़न, अकड़न एवं दर्द की संभावना अधिक रहती है। हल्के व्यायाम शरीर में संचार (Circulation) बढ़ाकर वात को संतुलित करने में सहायक होते हैं। योगशास्त्र के अनुसार ये अभ्यास शरीर की नाड़ियों (Energy Channels) को सक्रिय करते हैं, जिससे प्राण का प्रवाह अधिक संतुलित एवं सुचारु होता है।
आधुनिक व्यायाम विज्ञान के अनुसार वार्म-अप करने से—
योगासन प्रारम्भ करने से पूर्व 10 –15 मिनट तक किए गए हल्के व्यायाम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सुरक्षित एवं प्रभावी योगाभ्यास की आधारशिला हैं। ये शरीर को गर्म, लचीला एवं सक्रिय बनाते हैं, मन को एकाग्र करते हैं तथा चोटों से बचाते हैं। इसलिए प्रत्येक योगाभ्यासी—चाहे वह प्रारम्भिक स्तर का हो या अनुभवी—उसे योगासन से पहले नियमित रूप से वार्म-अप अवश्य करना चाहिए। यही अभ्यास योग को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और आनंददायक बनाता है।
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