01
शौच (स्वच्छता) अत्यंत आवश्यक है — इसमें स्थान, शरीर और मन की स्वच्छता शामिल है।
02
योग हमेशा शांत, स्वच्छ और हवादार वातावरण में करें।
03
योग खाली पेट या भोजन के 4 – 5 घंटे बाद करें।
04
योग के समय मूत्राशय खाली होना चाहिए।
05
योग करने के लिए योगा मैट, दरी या कंबल का उपयोग करें। बेड पर भी योग किया जा सकता है लेकिन उसके लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बेड इतना सॉफ्ट नहीं हो कि पोस्चर, रीढ़ कि हड्डी सीधी न रह पाए, अर्थात् गद्दे हार्ड हों । कुछ योग कुर्सी पर बैठ कर भी किये जा सकते हैं।
06
योग करते समय हल्के, ढीले, और आरामदायक कपड़े पहनें।
07
अत्यधिक थकान, या अत्यधिक तनाव की स्थिति में योग न करें। रोग की अवस्था में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ के परामर्श से ही करें।
08
किसी पुरानी बीमारी या हृदय रोग होने पर डॉक्टर या योग विशेषज्ञ से सलाह लें, और योग को सम्पूर्ण चिकित्सा का विकल्प न समझें बल्कि चिकित्सा का एक आवश्यक सहायक अंग समझ कर अपनाएं ।
09
गर्भावस्था या मासिक धर्म के दौरान योग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
10
योग अभ्यास की शुरुआत प्रार्थना या संकल्प से करें ; और योगासनों के पहले सूक्ष्म व्यायाम अवश्य करें। योगासनों का क्रम भी पहले खड़े रह कर किए जाने वाले योग, बैठ कर करने वाले, पेट के बल (उलटे) लेट कर किए जाने वाले और अंत में सीधे (पीठ के बल) लेट कर किए जाने वाले योग रखना चाहिए; और योग का समापन हमेशा CRT या किसी अन्य रिलैक्सेशन तकनीक से करना चाहिए।
11
योग हमेशा धीरे-धीरे और सजगता के साथ करें।
12
जब तक विशेष रूप से निर्धारित न किया जाये, श्वास न रोकें।
13
श्वास हमेशा नाक से लें।
15
अपनी क्षमता के अनुसार ही योग करें। किसी भी आसन को साधने में जवरदस्ती बिल्कुल न करें; जितना साध पा रहे हों, उतने से ही शुरू करें। कुछ दिनों के नियमित अभ्यास से धीरे धीरे बेहतर तरीके से स्वतः ही साधने लगेंगे ।
16
अच्छे परिणाम के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है।
17
हर योग अभ्यास के कुछ निषेध होते हैं — उन्हें ध्यान में रखें।
18
योग का समापन ध्यान/ शांति पाठ / संकल्प से करें।
19
योग के 20–30 मिनट बाद ही स्नान या भोजन करें।