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क्यू आर टी अर्थात क्विक रिलैक्सेशन टेक्नीक (शीघ्र विश्राम विधि)
क्यू आर टी अर्थात क्विक रिलैक्सेशन टेक्नीक (शीघ्र विश्राम विधि)
विधि
शीघ्र विश्राम विधि (QRT) की विधि
- 01 क्यू आर टी अर्थात क्विक रिलैक्सेशन तकनीक या शीघ्र विश्राम विधि। शीघ्र विश्राम विधि के तीन चरण हैं। पहले चरण में हम अपनी श्वास का ऑब्जरवेशन करते हैं। दूसरे चरण में श्वास का पेट की मांसपेशियों के साथ सिंक्रोनाइज़ेशन करते हैं। और तीसरे चरण में जो कुछ अनुभव हो रहा है उस अनुभव को अन्दर से महसूस करते हैं।
- 02 क्यू आर टी का अभ्यास करने के लिए शवासन में लेट जाएँ। दोनों पैरों के बीच एक से डेढ़ फीट का फासला, दोनों हाथ कमर के समानांतर लगभग छह से आठ इंच की दूरी पर, और आँखें कोमलता से बंद कर लें। पूरा शरीर एक दम ढीला छोड़ दें, और अपना ध्यान पूरे शरीर पर केन्द्रित करें।
- 03 अब अपने ध्यान को नाभि क्षेत्र पर केन्द्रित करें और देखें कि हमारा श्वास-प्रश्वास किस प्रकार से चल रहा है। किसी भी प्रकार का कोई भी प्रयास नहीं करना है, केवल देखना है। पेट की मांसपेशियाँ ऊपर जा रही हैं, नीचे जा रही हैं, श्वास आ रहा है, श्वास जा रहा है।
- 04 कभी श्वास लेते हुए श्वास की लम्बाई ज्यादा है, कभी श्वास छोड़ते हुए श्वास की लम्बाई कम है; कभी श्वास छोड़ते हुए श्वास की लम्बाई ज्यादा है और लेते हुए सांस की लम्बाई कम है। यानि कि श्वास में जो एकरूपता होनी चाहिए, वह एकरूपता नहीं है, सिंक्रोनाइज़ेशन की स्थिति नहीं है।
- 05 अब अभ्यास के दूसरे चरण में अपना ध्यान नाभि पर केन्द्रित हुए पेट की मांसपेशियों को प्रयास पूर्वक फुलाना है और पेट की मांसपेशियों को प्रयास पूर्वक सिकोड़ना है। श्वास भरें, पेट की मांसपेशियों को फुलाएँ, श्वास छोड़ें, पेट की मांसपेशियाँ सिकुड़ें।
- 06 पूरा ध्यान नाभि पर। श्वास लेते हुए पेट गुब्बारे की तरह फूल रहा है, और श्वास छोड़ते हुए पेट की मांसपेशियाँ सिकुड़ रही हैं। लगातार प्रयास पूर्वक श्वास लें, पेट फूले, श्वास छोड़ें, पेट सिकुड़े। सांस भरें, टेक योर ओन टाइम; अपने सामान्य तरीके से श्वास लें, लेकिन प्रयास पूर्वक पूरे पेट को फुलाएँ, और पूरा पेट सिकुड़ने दें।
- 07 अब तीसरे चरण में प्रवेश करते हुए कोई प्रयास नहीं करना है, केवल अनुभव करना है कि आपने अभी तक जो अभ्यास किया उसका आपके पेट की मांसपेशियों के संचालन और श्वसन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। आप देखेंगे कि स्वतः ही पेट की मांसपेशियों के साथ-साथ श्वसन भी सिंक्रोनाइज़ होकर तारतम्य बना चुका है। जब आप श्वास भर रहे हैं बिना प्रयास तो पेट की मांसपेशियाँ स्वतः ही फूल रही हैं और जब आप सांस छोड़ रहे हैं, पेट की मांसपेशियाँ सिकुड़ रही हैं। मांसपेशियों के फूलने और सिकुड़ने का अनुभव करें, कोई प्रयास नहीं।
- 08 पेट की मांसपेशियाँ और श्वसन का स्वतः तारतम्य में आ जाना और अब जब आप श्वास ले रहे हैं तो आपके शरीर में ऊर्जा का अनुभव, श्वास छोड़ते हुए पूर्ण विश्राम की स्थिति, शिथिलता का अनुभव। श्वास भरते हुए शरीर की एक-एक कोशिका में ऑक्सीजन प्रवेश करती हुई और श्वास छोड़ते हुए शरीर की प्रत्येक कोशिका से कार्बन डाइऑक्साइड और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हुए। विश्राम को सांस के साथ-साथ भीतर जाने दें। सांस छोड़ते हुए पूरा तनाव और खिंचाव बाहर की ओर निकलता हुआ।
- 09 अब इस शिथिलता और विश्राम के अनुभव को प्रत्येक कोशिका में अनुभव करने के लिए अकारा चैंटिंग करेंगे। श्वास छोड़ें। सांस भरें। अकारा की ध्वनि — अ…………. अ………….। एक बार पुनः — अ………….।
- 10 अकारा की ध्वनि शरीर के निचले भाग में, विशेष तौर पर पेट के भाग में ध्वनि की तरंगों का अनुभव करें। ध्वनि की तरंगें शांत होती हुई, शरीर शिथिलता का अनुभव करता हुआ तथा शरीर की प्रत्येक कोशिका गहरे विश्राम की अवस्था में पहुँचती हुई अनुभव करें। विश्राम।
- 11 त्वरित विश्राम विधि द्वारा शिथिलता एवं विश्राम की स्थिति के गहरे अनुभव के पश्चात अब वापस बैठने की स्थिति में आने के लिए दोनों पैरों की एड़ियों को धीरे से आपस में मिलाएं। विश्राम में बाधा न पहुँचे। अपने दाहिने हाथ को जमीन की सतह की सहायता लेते हुए सिर के ऊपर की ओर ले जाएँ।
- 12 बाएँ पैर के घुटने को मोड़ें। दाहिनी ओर करवट लेते हुए अपने बाएँ हाथ की हथेली को छाती के सामने भूमि पर स्पर्श करें। दाहिने हाथ की हथेली को दाहिने कान के पास लाएँ। अब दोनों हाथों की हथेलियों की सहायता से धीरे-धीरे बैठने की स्थिति में आएँ। शिथिल दण्डासन की स्थिति में कुछ देर विश्राम करें।
- 13 अब किसी भी सुखद आसन का चुनाव करें— सुखासन, वज्रासन अथवा अर्ध पद्मासन। आँखें बंद रहें। त्वरित विश्राम विधि संपन्न।
लाभ
शीघ्र विश्राम विधि (QRT) के लाभ
- श्वास और पेट की मांसपेशियों के बीच प्राकृतिक समन्वय (Synchronization) स्थापित करता है।
- तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत कर मानसिक तनाव एवं चिंता को कम करता है।
- शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ऑक्सीजन का बेहतर संचार करने में सहायक है।
- गहरी शारीरिक एवं मानसिक शिथिलता (Deep Relaxation) प्रदान करता है।
- थकान, बेचैनी एवं मानसिक दबाव को कम कर ऊर्जा का अनुभव कराता है।
- पाचन क्रिया एवं डायाफ्रामिक ब्रीदिंग (Diaphragmatic Breathing) में सुधार करता है।
- ध्यान, एकाग्रता एवं आंतरिक जागरूकता (Mindfulness) को बढ़ाता है।
- योगाभ्यास के बाद शरीर एवं मन को सामान्य एवं संतुलित अवस्था में लाने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
किन स्थितियों / रोगों में लाभकारी
- तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) एवं मानसिक अशांति में विशेष रूप से लाभकारी।
- अनिद्रा (Insomnia), मानसिक थकान एवं अत्यधिक कार्यभार के कारण होने वाली शारीरिक थकावट में सहायक।
- उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) के नियंत्रण हेतु विश्राम तकनीक के रूप में उपयोगी।
- डिप्रेशन एवं भावनात्मक असंतुलन की स्थिति में मन को शांत करने में सहायक।
- पाचन विकार, गैस, एसिडिटी तथा तनावजनित पाचन समस्याओं में लाभकारी।
- अस्थमा एवं अन्य श्वसन विकारों में श्वास की लय सुधारने में सहायक।
- माइग्रेन, तनावजनित सिरदर्द तथा गर्दन–कंधों के तनाव को कम करने में उपयोगी।
- योगाभ्यास, प्राणायाम अथवा ध्यान के बाद शरीर एवं मन को गहन विश्राम देने के लिए अत्यंत उपयोगी।
सावधानियाँ
निषेध / सावधानियाँ
- अभ्यास के दौरान शरीर पर किसी प्रकार का अनावश्यक दबाव या कसाव न दें।
- यदि कमर, गर्दन या रीढ़ की गंभीर समस्या हो तो विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।
- गर्भावस्था, हाल ही में हुई सर्जरी अथवा किसी गंभीर रोग की स्थिति में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
- श्वास को अपनी क्षमता से अधिक देर तक न रोकें तथा पूरे अभ्यास के दौरान सहज और आरामदायक रहें।
Tip
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य शरीर को पूरी तरह शिथिल करना और श्वास के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। किसी भी चरण में जल्दबाज़ी न करें। श्वास, पेट की गतिविधि और शरीर में उत्पन्न होने वाली शांति को केवल महसूस करें। जितना गहरा आपका अनुभव होगा, उतना ही अधिक मानसिक और शारीरिक विश्राम प्राप्त होगा।
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