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थोरेसिक ब्रीदिंग
थोरैसिक ब्रीदिंग (छाती से सांस लेना) की विधि
थोरैसिक ब्रीदिंग या छाती से सांस लेना एक ऐसी श्वसन प्रक्रिया है, जिसमें सांस लेते समय डायाफ्राम के बजाय छाती की मांसपेशियों का उपयोग किया जाता है, जिससे सांस लेने पर छाती ऊपर और बाहर की ओर फैलती है। यह अक्सर तनाव या तीव्र गतिविधि के दौरान स्वाभाविक रूप से तेज़ और छोटी-छोटी सांस के रूप में होती है।
सांस लेते समय फेफड़ों के ऊपरी हिस्से में हवा भरी जाती है, जिससे पसलियां फैलती हैं और कंधे ऊपर उठते हैं।
तनाव, चिंता, अस्थमा या गलत पोस्चर के कारण लोग अक्सर डायफ्रामिक ब्रीदिंग के बजाय छाती से और कभी-कभी मुंह से सांस लेने लगते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से गलत है। सभी छोटे बच्चे स्वाभाविक रूप से पेट से ही सांस लेते हैं, लेकिन बड़े होने के साथ जैसे-जैसे तनाव, गलत पोस्चर आदि का शिकार होने लगते हैं, उनकी प्राकृतिक आदत में बदलाव आने लगता है।
थोरैसिक ब्रीदिंग में फेफड़ों के निचले हिस्से का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाता है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर कम रहता है और तनाव बढ़ता है।
योग और प्राणायाम का अभ्यास भी छाती की सांस से डायफ्रामिक सांस की ओर जाने में मदद कर सकता है; तथापि कुछ रोगावस्था में छाती की मांसपेशियों को भी सक्रिय करने की आवश्यकता हो सकती है, जिसे इस प्रकार करना चाहिए।
- 01 सीधे बैठें या आराम से लेट जाएं तथा अपने कंधों को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।
- 02 अपना एक हाथ छाती के ऊपरी हिस्से (सीने) पर रखें ताकि छाती की गति को महसूस कर सकें।
- 03 नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें और ध्यान दें कि आपकी छाती तथा पसलियां बाहर की ओर फैलें और कंधे ऊपर उठें, पेट नहीं।
- 04 सांस को 2–3 सेकंड तक सहज रूप से रोकें।
- 05 धीरे-धीरे नाक या मुंह से सांस छोड़ें और महसूस करें कि आपकी छाती अपनी सामान्य स्थिति में वापस आ रही है।
- 06 इस प्रक्रिया को 5–10 बार आराम से दोहराएं।
थोरैसिक ब्रीदिंग के लाभ
- छाती की मांसपेशियों तथा पसलियों की गतिशीलता बढ़ाने में सहायक है।
- फेफड़ों के ऊपरी भाग को सक्रिय करने में सहायता करती है।
- कुछ विशेष रोग अवस्थाओं में सहायक श्वसन अभ्यास के रूप में उपयोगी हो सकती है।
- योग एवं प्राणायाम के अभ्यास के दौरान छाती की सांस से डायफ्रामिक सांस की ओर जाने में सहायक तथा श्वसन नियंत्रण विकसित करने में मदद करती है।
- आवश्यक होने पर सहायक श्वसन मांसपेशियों को सक्रिय करने में उपयोगी होती है।
किन रोगों में लाभकारी / सहायक
- कुछ श्वसन संबंधी रोग अवस्थाओं में विशेषज्ञ की सलाह अनुसार सहायक अभ्यास के रूप में किया जा सकता है।
- अस्थमा के कुछ मामलों में श्वसन प्रशिक्षण के अंतर्गत उपयोग किया जा सकता है।
- छाती की मांसपेशियों को सक्रिय करने की आवश्यकता होने पर उपयोगी हो सकता है।
निषेध / सावधानियाँ
- थोरैसिक ब्रीदिंग के दौरान पेट के मूवमेंट को कम से कम रखने का प्रयास करें।
- सांस लेने या छोड़ने की प्रक्रिया में किसी प्रकार का अधिक जोर न लगाएं।
- अभ्यास हमेशा आरामदायक गति से करें।
- यदि सांस लेने में तकलीफ, चक्कर या असुविधा महसूस हो तो अभ्यास रोक दें और विशेषज्ञ से सलाह लें।
महत्वपूर्ण सुझाव
थोरैसिक ब्रीदिंग का अभ्यास शांत वातावरण में करें। सांस को सहज और नियंत्रित रखें तथा पूरे अभ्यास के दौरान शरीर को आराम की स्थिति में बनाए रखें।
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