अवसाद: अवसाद एक आम लेकिन गंभीर मनोदशा विकार है। यह कई तरह से भावनाओं, सोच और दैनिक गतिविधियों जैसे कि खाने, काम करने या सोने को प्रभावित करता है। अवसाद सभी उम्र, वंश जाती और लिंग के लोगों को प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में पुरूषों की तुलना में अवसाद का निदान अधिक बार होता है, लेकिन पुरूष भी अवसादग्रस्त हो सकते हैं। क्योंकि पुरूषों में अपनी भावनाओं या भावनात्मक समस्याओं को पहचानने, उनकें बारे में बात करने और मदद लेने की संभावना कम होती है, इसलिए उनके अवसाद के लक्षणों का निदान न होने या कम इलाज होने का जोखिम अधिक होता है। यह कई प्रकार का हो सकता है जैसेः
- गंभीर अवसाद: इससे अवसादग्रस्त मनोदशा या रूचि की कमी हो सकती है, ज्यादातर मामलों में कम से कम 2 सप्ताह तक। इसे परिणामस्वरूप दैनिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न होती है।
- लगातार अवसादग्रस्तता विकार – इसमें अवसाद के कम गंभीर लक्षण हो सकते है।
- मौसमी भावात्मक विकार – यह अवसाद है जो मौसम के साथ आता और चला जाता है। इस प्रकार के अवसाद के लक्षण आमतौर पर सर्दियों की शुरुआत में शुरू होते हैं और वसंत और गर्मियों के दौरान चले जाते हैं।
- मनोविकृति के लक्षणों के साथ अवसाद: यह अवसाद का सबसे गंभीर रूप है, जिसमें व्यक्ति मनोविकृति के लक्षणों का अनुभव करता है, जैसे भ्रम (झूठे विश्वास) या मतिभ्रम (कुछ ऐसा देखना या सुनना जो वास्तव में नहीं है)।
- द्विध्रुवी (उन्मत्त) अवसाद: इस प्रकार के अवसाद में व्यक्ति उदास, उदासीन या निराश महसूस करता है, साथ ही उसकी गतिविधि का स्तर बहुत कम हो जाता है, और इसमें उच्च मनोदशा के उन्मत्त प्रकरण भी हो सकते हैं, जैसे कि बहुत खुश महसूस करना, उदासी में रोना, चिड़चिड़ापन आदि, साथ ही गतिविधि के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाती है।
- विघटनकारी मनोदशा असंतुलन विकार: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे या किशोर निरंतर चिड़चिड़ापन, क्रोध और बार-बार तीव्र गुस्से का अनुभव करते हैं।
- प्रीमेनस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (PMDD): यह महिलाओं की एक स्वास्थ्य समस्या है और यह प्रीमेनस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) से काफी मिलती-जुलती है, लेकिन यह अधिक गंभीर है। PMDD के कारण महिलाओं में पीरियड्स के समय, आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने से एक या दो हफ़्ते पहले गंभीर चिड़चिड़ापन, अवसाद या चिंता होती है।
कारण : अवसाद कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे कि जीवन मे बड़े नकारात्मक बदलाव, आघात या तनाव, सिंथेटिक हार्मोंनल दवाओं जैसी कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण विकसित हो सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि आनुवंशिक, जैविक, पर्यावरणीय और मनोवैज्ञानिक कारण भी अवसाद में भूमिका निभाते हैं।
अवसाद, विशेष रूप से मध्य आयु या अधिक आयु में, अन्य गंभीर चिकित्सा बीमारियों के साथ हो सकता है, जैसे महुमेह, कैंसर, हृदय रोग, दीर्घकालिक दर्द और पांर्किंसंस रोग।
लक्षण : अवसाद के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं – लगातार उदास, चिंतित या ‘‘खाली’’ मूड, क्रोध या चिड़चिड़ापन, निराशा या निराशावाद, हताश या बैचेनी में वृद्धि, अपराधबोध, बेकारपन या असहायता की भावना, शौक और गतिविधियों में रूचि या खुशी की कमी, ध्यान केंद्रित करने, याद रखने या निर्णय लेने में कठिनाई, सोने में कठिनाई, सुबह बहुत जल्दी जागना या अधिक सोना, यौन इच्छा और प्रदर्शन में समस्या, शारीरिक दर्द या पीड़ा, सिरदर्द, ऐंठन या पाचन संबंधी समस्याएं जिनका कोई स्पष्ट शारीरिक कारण नहीं है जो उपचार से ठीक नहीं होती हैं, परिवार और दोस्तों से अलग रहना, मृत्यु या आत्महत्या के विचार या आत्महत्या का प्रयास।