हार्दिक समर्पण

हृदय से, कृतज्ञता के साथ

ज्ञान, परिवार और जीवन को दिशा देने वाले अपनों के प्रति श्रद्धा एवं आभार।

ज्ञान के प्रति समर्पण
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ज्ञान के प्रति समर्पण

हे सच्चे ज्ञान के दाता प्रभु ! आप सार्वभौमिक मध्यस्थ हैं और सभी के कर्मों का सटीक परिणाम देते हैं। आज का मनुष्य आपके सच्चे ज्ञान वेद और प्रकृति की अवहेलना करके विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं से पीड़ित है। अपने भाइयों की इस पीड़ा से दुखी होकर, आपके इस पुत्र ने जिस भावना और इरादे से यह सब लिखने की कोशिश की है, उसे आप ही सबसे अच्छी तरह जानते हैं। मुझ जैसे अज्ञानी व्यक्ति के हृदय में ऐसी भावना उत्पन्न होना और उसका इस कार्य को पूरा करना केवल आपकी प्ररेणा का परिणाम है। इसलिए, यह कृति आपके चरणों में समर्पित है।

माता-पिता के प्रति कृतज्ञता
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माता-पिता के प्रति कृतज्ञता

मेरे माता-पिता को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि, जिनकी बचपन में दी गई सीखों से मुझे जीवन की सभी विषमतम परिस्थितियों में भी बिना विचलित हुए सदैव प्रसन्न रहने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा मिलती रही । इतना ही नहीं, बल्कि बचपन में स्वास्थ्य और चिकित्सा से संबंधित उनके विभिन्न शिक्षण भी इस विषय की औपचारिक शिक्षा की तुलना में भारी साबित हुए। इसलिए मैं उनका बहुत ऋणी हूं और उनको विशेष स्मरण और नमन।

दादा और मम्मा का स्नेहपूर्ण स्मरण
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दादा और मम्मा का स्नेहपूर्ण स्मरण

मेरे दादा (भाई) और मम्मा (भाभी) को मेरी विशेष श्रद्धांजलि और व्यथित स्मरण जिन्होंने मेरे पिता के निधन के बाद बेहद विपरीत परिस्थितियों में भी, न सिर्फ मुझे साहस, धीरज और शांति दी, मेरे जीवन को इतनी गंभीरता से संभाला, कि कभी भी मुझे अपने माता-पिता की कमी महसूस नहीं होने दी, मुझे प्राईवेट पढ़ाई की जगह कॉलेज में नियमित शिक्षा के लिए मजबूर किया और मेरी सारी शिक्षा का प्रबंधन भी किया। आज मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं की बदौलत हूं इसलिए, यह उन्हें भी विशेष रूप से समर्पित है।

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