वीर भद्रासन
वीरभद्रासन की विधि
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01
योगा मैट के अगले हिस्से पर ताड़ासन की स्थिति में सीधे खड़े हो जाएँ। -
02
पैरों को हल्का मोड़ें। बाएँ पैर को 3–4 फीट पीछे ले जाएँ। दोनों एड़ियों को एक सीध में रखें। बाएँ पैर का पंजा 45° तथा दाहिने पैर का पंजा 90° पर रखें। -
03
शरीर को सामने की ओर सीधा रखें। दाहिने घुटने को इतना ही मोड़ें कि वह टखने की सीध में रहे। -
04
दोनों हाथों को ऊपर उठाकर उंगलियों को इंटरलॉक करें, लेकिन दोनों इंडेक्स फिंगर को सीधा और आपस में सटा हुआ रखें। -
05
गर्दन को हल्का ऊपर उठाएँ और अपना ध्यान हाथों के अंगूठों या माथे के आज्ञा चक्र पर केंद्रित करें। -
06
कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहें। ध्यान रखें कि शरीर पीछे की ओर न झुके। -
07
धीरे-धीरे हाथों को कमर पर रखते हुए प्रारंभिक स्थिति में लौटें और यही प्रक्रिया दूसरी ओर भी दोहराएँ।
वीरभद्रासन के लाभ
- भुजाओं, टांगों और कमर के निचले हिस्से को मजबूत एवं लचीला बनाता है।
- जमे हुए कंधों का तनाव कम करने में सहायक है।
- शरीर का संतुलन और सहनशक्ति बढ़ाता है।
- सही शारीरिक मुद्रा (Posture) विकसित करने में मदद करता है।
- व्यक्तित्व में सौम्यता, साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति बढ़ाने में सहायक है।
किन रोगों में लाभकारी / सहायक
- पीठ दर्द और झुके हुए कंधों (Poor Posture) में लाभकारी।
- फ्रोजन शोल्डर में सहायक।
- घुटने की उपास्थि के घिसाव (कॉन्ड्रोमैलेशिया) में विशेषज्ञ की देखरेख में उपयोगी।
- साइटिका की समस्या में सहायक।
- मानसिक तनाव और अनिद्रा में लाभकारी।
- अधिक वजन (Obesity) कम करने में सहायक।
निषेध / सावधानियाँ
- उच्च रक्तचाप होने पर डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही यह आसन करें।
- गंभीर हृदय रोग की स्थिति में विशेषज्ञ के परामर्श के बिना अभ्यास न करें।
- रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट होने पर यह आसन डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।
Tip
आगे वाले घुटने को हमेशा टखने की सीध में रखें और शरीर को पीछे की ओर झुकाने के बजाय रीढ़ को सीधा रखते हुए संतुलन बनाए रखें।
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