रेजोनेंस ब्रीदिंग
रेजोनेंस ब्रीदिंग (Resonance Breathing) करने की विधि
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सुखासन, पद्मासन, वज्रासन अथवा किसी कुर्सी पर कमर सीधी रखकर आराम से बैठ जाएं। यदि बैठना संभव न हो तो पीठ के बल आरामदायक स्थिति में लेट सकते हैं। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें और आंखें कोमलता से बंद कर लें। -
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नाक से लगभग 5 से 6 सेकंड में धीरे-धीरे और गहरी सांस लें। समय का अनुमान लगाने के लिए चाहें तो मन ही मन धीरे-धीरे 1 से 6 तक गिन सकते हैं। सांस लेते समय पेट को बाहर की ओर फूलने दें अर्थात पेट (डायफ्राम) से श्वास लें। -
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अब अगले 5 से 6 सेकंड में नाक से ही धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। सांस छोड़ते समय पेट को धीरे-धीरे अंदर की ओर सिकुड़ने दें और श्वास को बिना किसी झटके के पूरी तरह बाहर आने दें। -
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इस प्रकार लगभग 10 से 12 सेकंड में श्वास का एक पूरा चक्र सम्पन्न होगा, अर्थात एक मिनट में लगभग 5 से 6 श्वास लें। पूरे अभ्यास के दौरान श्वास को सहज, शांत और लयबद्ध बनाए रखें। -
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इस प्रक्रिया का अभ्यास प्रतिदिन लगभग 20 मिनट तक करें। यदि एक साथ 20 मिनट संभव न हो तो इसे 10-10 मिनट के दो सत्रों में भी किया जा सकता है। -
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अभ्यास के दौरान केवल श्वास की लय पर ध्यान रखें। श्वास को जबरदस्ती रोकने, खींचने या तेज करने का प्रयास न करें। अभ्यास समाप्त होने पर कुछ क्षण शांत बैठकर शरीर और मन में आए परिवर्तन का अनुभव करें।
रेजोनेंस ब्रीदिंग (Resonance Breathing) के लाभ
- यह वेगस नर्व (Vagus Nerve) को सक्रिय करता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक रिलैक्सेशन प्रतिक्रिया बढ़ती है तथा चिंता और मानसिक तनाव कम होता है।
- हृदय गति परिवर्तनशीलता (Heart Rate Variability – HRV) को बढ़ाता है, जो बेहतर हृदय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
- हृदय और श्वसन प्रणाली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करता है।
- हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक है।
- फेफड़ों की कार्यक्षमता एवं श्वसन क्षमता में सुधार करता है।
- शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाकर ऊर्जा एवं कार्यक्षमता में सुधार करता है।
- तंत्रिका तंत्र को शांत करके गहरी नींद, मानसिक विश्राम एवं भावनात्मक संतुलन में सहायता करता है।
- नियमित अभ्यास से एकाग्रता, मानसिक स्थिरता तथा तनाव सहन करने की क्षमता बढ़ती है।
किन रोगों / स्थितियों में लाभकारी
- चिंता (Anxiety), घबराहट (Panic) तथा मानसिक तनाव में विशेष रूप से लाभकारी।
- उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) को नियंत्रित रखने में सहायक।
- अनिद्रा (Insomnia) तथा नींद की खराब गुणवत्ता में उपयोगी।
- अस्थमा, सीओपीडी (COPD) तथा अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं में सहायक श्वसन अभ्यास।
- हृदय स्वास्थ्य सुधारने तथा तनावजनित हृदय संबंधी समस्याओं में उपयोगी।
- मानसिक थकान, भावनात्मक असंतुलन तथा अत्यधिक कार्यभार की स्थिति में लाभकारी।
सावधानियाँ
- श्वास को जबरदस्ती लंबा, तेज या गहरा करने का प्रयास न करें।
- पूरे अभ्यास के दौरान श्वास सहज, शांत और लयबद्ध रखें।
- यदि चक्कर, बेचैनी या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो तो अभ्यास रोककर सामान्य श्वास लें।
- अभ्यास हमेशा शांत, स्वच्छ एवं हवादार स्थान पर करें।
- गंभीर हृदय रोग, गंभीर श्वसन रोग या अन्य गंभीर चिकित्सकीय स्थिति में डॉक्टर या योग विशेषज्ञ के परामर्श से ही अभ्यास करें।
Tip
सर्वोत्तम परिणामों के लिए प्रतिदिन एक ही समय पर अभ्यास करें। श्वास को बिना किसी तनाव के सहज, धीमा और समान रखें। यदि 5-6 सेकंड तक श्वास लेना या छोड़ना कठिन लगे तो अपनी क्षमता के अनुसार समय रखें और नियमित अभ्यास के साथ धीरे-धीरे 5-6 सेकंड तक पहुंचें।
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