भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम की विधि
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01
सुखासन, या किसी भी आरामदायक मुद्रा में या कुर्सी पर सीधे बैठकर रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। -
02
अपने दोनों अंगूठों को कानों के बाहरी छिद्र पर रखें । -
03
Index finger को माथे पर भौंहों के ठीक ऊपर रखें। -
04
मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठा उंगलियों को आंखों और नाक के पास गालों पर हल्के से रखें। इस प्रकार आपकी उंगलियां सभी साइनस पर रहेंगी । -
05
होठों को हल्के से बंद करें और दांतों को थोड़ा अलग रखें। जीभ की टिप को हलके से तालू से छूता हुआ रखें । -
06
नाक से एक गहरी और लंबी सांस अंदर लें। नाक से ही सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे भौंरे की तरह गूंजती हुई ध्वनि निकालें। -
07
ध्वनि निकालते समय, कंपन को अपने पूरे मस्तिष्क में महसूस करें। सांस पूरी तरह बाहर निकलने के बाद, रुकें और फिर से सांस भरकर यह प्रक्रिया 3 से 7 बार या अपेक्षित समय तक दोहराएं ।
भ्रामरी प्राणायाम के लाभ
- यह प्राणायाम मन को तुरंत शांत करता है, चिंता, क्रोध और हताशा जैसी नकारात्मक भावनाओं को कम करता है।
- रात में सोने से पहले भ्रामरी करने से गहरी और अच्छी नींद आती है।
- यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाकर फोकस और मेमोरी को तेज करता है।
- हृदय प्रणाली को आराम देकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- इसकी गूंज वाली ध्वनि मस्तिष्क की नसों को रिलैक्स करती है, जिससे माइग्रेन के दर्द में कमी आती है।
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