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हम जो कुछ भी खाते पीते हैं उसका हमारे स्वास्थ पर प्रभाव पड़ना अवश्यम्भावी है । जबकि किसी भी प्रकार के दूषित या संक्रमित भोजन का प्रभाव शीघ्र होता है और हम कुछ ही समय में वमन, पेट दर्द, अतिसार , आत्रशोथ आदि के शिकार होते हैं; लेकिन विसंगत, न पचने योग्य, अस्वास्थ्यकर, असंतुलित, असमय आदि प्रकार के भोजन का दुष्परिणाम तत्कालीन न होकर धीरे धीरे, दूरगामी होता है और अनेक प्रकार के जीर्ण, गम्भीर और चिरकालिक, जीवन शैली से सम्बंधित रोगों के रूप में कालांतर में प्रकट होता है । इस प्रकार के रोगों से बचे रहने का एक मात्र उपाय स्वास्थ्यप्रद भोजन की आदत और स्वस्थ जीवन
शैली अपनाने के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है । इस लेख में हम स्वास्थ्यप्रद और स्वास्थ्यरक्षक भोजन के विषय के कुछ आवश्यक पहलुओं की चर्चा करेंगे ।

1.    क्या अधिक खाएं :

a.   मौसमी फल,

b.   हरी सब्जियां और पत्ते वाले साग (ध्यान रखें आलू सब्जी नहीं है; इसके गुण रोटी के सामान हैं और यह रोटी का विकल्प है न कि सब्जियों का) ।

c. दालें, चना, राजमा आदि

2.   क्या कम खाएं :

a. चीनी

b. नमक

c. घी, तेल

d. तले हुये खाद्य पदार्थ  (कम नहीं बल्कि बहुत बहुत कम)

3.    क्या न खाएं

a. पशु आधारित पदार्थ (मांस, मछली, अंडा आदि)

b. घनीभूत किये हुये डेयरी उत्पाद (पनीर,रबड़ी, मावा आदि)

c. प्रोसेस्ड और पैक्ड खाद्य पदार्थ

d. मैदा से बने खाद्य पदार्थ

e. सभी प्रकार के फ़ास्ट फ़ूड और जंक फ़ूड

f.   कार्बोनेटेड और अल्कोहलिक पेय

4.    दिनचर्या : जैविक घड़ी के अनुसार रखें; और 30 – 35 वर्ष की आयु के बाद केवल तीन भोजन करें –

a.  नाश्ता – सुबह 8 बजे से पहले

b.  दोपहर का भोजन – 12 बजे से पहले

c.   रात्रि का भोजन – सूरज डूबने से पहले दो भोजन के बीच में
पानी और नींबू पानी के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं

   छोटे बच्चे जिन्हें बार बार कुछ खाने को चाहिए – उनको शुरू से ही मोसमी फल, मखाना, रोस्टेड अनाज (चना, बाजरा, ज्वार, मुरमुरे, पोहा, रेत में भुने पॉपकॉर्न आदि), मूंगफली, सूखे मेवे, घर में बनी आटे की मठरी, सूखे मेवे, बीज और आटे से घर में बने लड्डू की आदत डालें इसके अतिरिक्त मखाने या चावल की खीर, दलिया, या दूध में सूजी (पतली या सेमी सॉलिड) भी बना कर रखी जा सकती है ।

5.    हर भोजन में शामिल करें :

a.कुछ मौसमी फल 

b.कुछ स्वास्थ्यप्रद प्रोटीन

c.  छाछ या दूध (शाम को छाछ नहीं) 

   सुबह का नाश्ता हल्का लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर (अंकुरित चनामूंग, मोठ;  मूंग दाल का चीला, भिगोय हुए सूखे मेवे, मौसमी फल, छाछ या दूध), दोपहर के भोजन में सलाद, दाल, हरी सब्जियां, फल और छाछ । इसी प्रकार शाम का भोजन में छाछ की जगह दूध । दिन में दो बार सलाद ज़रूर लें । कम से कम तीन लाल रंग की सब्जियां ज़रूर लें (चुकंदर, गाज़र (लाल या पीली), टमाटर, लाल शिमला मिर्च, चौलाई का साग, लाल पत्तागोभी (सर्दियों में) ।

6.    साबुत और मोटे अनाज शामिल करें :

  दिन में दो बार (दोपहर और रात के भोजन में) ।

  ओट्स, जौ, ज्वार, बाजरा, चना, मक्का (सभी चोकर सहित, केवल चक्की का पिसा आटा, पैकेट वाला आटा नहीं – इसमें केमिकल मिलाये जाते हैं);

  क्विनोआ, समग के चावल, या ब्राउन राइस ।

 

7.    सीमित करें :

बाहर का खाना – 15 दिन में एक बार ।

उसमें भी स्वस्थ विकल्प चुनें

  अनुकूलन करें – कम से कम घी, मक्खन, तेल

– कम से कम मसाले, लाल मिर्च की जगह हरी मिर्च

  बाहर के खाने में दही अनिवार्य ।

8.    अवश्य करें

  अधिक से अधिक 10 बजे तक सो जाना ।

  सूर्योदय से पहले उठना ।

  सोने से एक घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद (टी. बी.,
लैपटॉप, फ़ोन, वाई-फ़ाई)

  सोने से पहले आधा घंटा भ्रमण (वाक) ।

  सोने से पहले 20 मिनट फ़ोकस ब्रीदिंग या
रेजोनेंस ब्रीदिंग ।

9.    पनीर क्यों नहीं :

  इसमें 18-20% प्रोटीन के साथ 25 27 % फैट भी होता है, जिसके कारण यह लाभ के बजाय हानिकारक हो जाता है; इसकी सब्जी बनाने में प्रयोग होने वाला फैट इसके
अपने फैट से भी अतिररिक्त ।

  इसके नकली होने की प्रवल सम्भावना ।

  पाचन में बहुत भारी, कब्ज़ का कारक ।

  इसमें संक्रमण बहुत ज़ल्दी होता है जिसका स्वाद
में आसानी से पता भी नहीं चलता, यदि संक्रमित हुआ तो खाने के कुछ ही घंटों में आप
अस्पताल तक पहुँच सकते हैं । 

10. मांसाहार क्यों नहीं

  सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल संपन्न, ब्लॉकेज
और अन्य हृदय रोगों का कारक ।

  कैंसर का कारक (WHO और अन्य स्वास्थ्य संबंधी संस्थाएं) ।

  डायबिटीज का खतरा 30% अधिक ।

  पेट फूलना, गैस, एसिडिटी और कब्ज का कारक ।

  इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग का खतरा ।

  प्रकृति ने हमें शाकाहारी जीवों जैसे मोलार दांत
दिये हैं न की माँसाहारी जीवों जैसे
 कैनाइन दांत अतः प्रकृति का आदेश शाकाहारी रहने का ही है ।

                         

 

 

 

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