सुप्त पादांगुष्ठासन
सुप्त पादांगुष्ठासन की विधि
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01
पीठ के बल सीधे लेटें और गहरी सांस लें। -
02
सांस छोड़ते हुए दाहिने पैर को बिना मोड़े 90° तक ऊपर उठाएं और दाहिने हाथ से पैर के अंगूठे को पकड़ें। यदि अंगूठा पकड़ने में कठिनाई हो तो शुरुआत में बाएं पैर को घुटने से थोड़ा मोड़ सकते हैं। -
03
रीढ़ को सीधा रखें और बायां पैर जमीन पर स्थिर रखें। -
04
इसी स्थिति में 5–10 गहरी सांसें लेते हुए बने रहें। -
05
धीरे-धीरे दाहिने पैर को नीचे लाएं। -
06
यही प्रक्रिया दूसरे पैर से दोहराकर एक चक्र पूरा करें। -
07
3 से 5 चक्र अपनी क्षमता के अनुसार दोहराएं।
सुप्त पादांगुष्ठासन के लाभ
- साइटिका एवं लोअर बैक के दर्द में राहत देता है।
- कूल्हों, जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- वेरीकोज वेन्स में लाभकारी है।
- पाचन क्रिया में सुधार करता है।
- प्रजनन तंत्र के हार्मोन संतुलित करने में सहायक है।
किन रोगों में लाभकारी / सहायक
- साइटिका एवं कमर दर्द में विशेष रूप से लाभकारी।
- हैमस्ट्रिंग और जांघों की अकड़न में सहायक।
- घुटनों एवं कूल्हों के गठिया (Arthritis) में लाभकारी।
- पार्किंसंस, अल्जाइमर एवं लकवा जैसी समस्याओं में सहायक।
- उच्च रक्तचाप, मासिक धर्म के दर्द एवं ऐंठन में लाभकारी।
- पाचन विकारों के उपचार में सहायक।
निषेध / सावधानियाँ
- उच्च रक्तचाप, ग्लूकोमा, घुटनों, कूल्हों, कमर, कंधों या हाथ में गंभीर चोट या दर्द तथा गर्भावस्था की स्थिति में यह आसन न करें।
Tip
यदि पैर का अंगूठा पकड़ना कठिन लगे तो योगा स्ट्रैप या तौलिये का उपयोग करें। अभ्यास के दौरान घुटने को मोड़ने से बचें और सांस को सामान्य रखें।
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