सिंहासन
सिंहासन की विधि
-
01
घुटनों को मोड़कर वज्रासन की मुद्रा में बैठें और दोनों घुटनों के बीच थोड़ा अंतर रखें। -
02
दोनों हथेलियों को घुटनों के सामने फर्श पर मजबूती से रखें। -
03
नाक से गहरी सांस लें और जीभ को पूरी तरह बाहर निकालते हुए ठुड्डी की ओर खींचें। -
04
मुंह खोलकर शेर की दहाड़ की तरह “हा…” की आवाज़ के साथ सांस बाहर छोड़ें। -
05
इस दौरान आँखों को पूरी तरह खोलकर सामने या भृकुटि की ओर देखने का प्रयास करें। -
06
सांस सामान्य होने दें और पुनः प्रारंभिक स्थिति में आ जाएँ। -
07
इस अभ्यास को 3 से 5 बार दोहराएँ।
सिंहासन के लाभ
- गले, गर्दन, फेफड़ों और छाती की मांसपेशियों में अच्छा खिंचाव उत्पन्न करता है।
- थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में सहायक है।
- चेहरे के तनाव और चिड़चिड़ेपन को कम करता है।
- श्वसन क्षमता में सुधार करने में मदद करता है।
- मन को शांत कर तनाव कम करने में सहायक है।
किन रोगों में लाभकारी / सहायक
- थायरॉइड संबंधी समस्याओं में सहायक।
- हकलाना, तुतलाना तथा स्पष्ट न बोल पाने की समस्या में लाभकारी।
- टॉन्सिल्स एवं मुंह-गले के रोगों में उपयोगी।
- दाँत पीसना, जबड़े की जकड़न या दर्द में सहायक।
- आँखों की जलन और थकान कम करने में लाभकारी।
- अस्थमा एवं अन्य श्वसन रोग, पाचन विकार, कमर दर्द, मानसिक तनाव और चिंता में सहायक।
निषेध / सावधानियाँ
- घुटनों, टखनों या गर्दन में गंभीर चोट होने पर यह आसन न करें।
- यदि हाल ही में गले या चेहरे की सर्जरी हुई हो तो इस आसन का अभ्यास न करें।
Tip
सांस छोड़ते समय जीभ को पूरी तरह बाहर निकालें और “हा…” की आवाज़ स्पष्ट रूप से निकालें। चेहरे की सभी मांसपेशियों को पूरी तरह सक्रिय करें।
Need Expert Guidance?
Our yoga experts are here to help you practice correctly and safely for maximum benefits.
Book an Appointment