परिवृत्त सुखासन
परिवृत्त सुखासन की विधि
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01
सुखासन में बैठ जाएँ। सांस लेते हुए रीढ़ को सीधा करें और सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे दाईं ओर मुड़ें। -
02
बायाँ हाथ दाएँ घुटने पर रखें और दायाँ हाथ पीछे जमीन पर टिकाएँ। -
03
रीढ़ को सीधा रखते हुए कंधों को पीछे की ओर घुमाएँ और पीछे देखने का प्रयास करें। -
04
इस स्थिति में 5 से 10 गहरी सांसें लें। -
05
धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में वापस आएँ। -
06
इसी प्रकार दूसरी ओर भी पूरा अभ्यास करें। -
07
इस अभ्यास को 3 से 5 बार दोहराएँ।
परिवृत्त सुखासन के लाभ
- मणिपुर चक्र को सक्रिय कर आत्मविश्वास और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक है।
- शारीरिक मुद्रा (Posture) में सुधार करता है।
- कमर दर्द में राहत देने और रीढ़ को लचीला बनाने में सहायक है।
- पाचन क्रिया, रक्त संचार और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करता है।
- मन को शांत कर तनाव और चिंता कम करने में मदद करता है।
किन रोगों में लाभकारी / सहायक
- क्रॉनिक लोअर बैक पेन एवं उससे जुड़े तनाव में लाभकारी।
- पीठ एवं कंधों की जकड़न दूर करने में सहायक।
- मेटाबोलिज्म सुधारने में उपयोगी।
- कब्ज, गैस और अपच की समस्या में लाभकारी।
- कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम करने में सहायक।
- मोटापा (Obesity), डायबिटीज एवं श्वसन रोगों में उपयोगी।
- उच्च रक्तचाप एवं हृदय स्वास्थ्य (Cardio-Metabolic Health) के लिए सहायक।
निषेध / सावधानियाँ
- गंभीर साइटिका की स्थिति में यह आसन डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
- स्लिप डिस्क होने पर विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें।
- पीठ, घुटने या कूल्हे में गंभीर चोट या दर्द होने पर यह आसन डॉक्टर या योग विशेषज्ञ के परामर्श से ही करें।
Tip
कमर से नहीं, बल्कि रीढ़ को लंबा रखते हुए धीरे-धीरे ट्विस्ट करें। गर्दन और कंधों को ढीला रखें तथा दोनों नितम्ब जमीन पर टिके रहें।
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