हलासन
हलासन की विधि
-
01
पीठ के बल सीधे लेट जाएँ। दोनों हाथ शरीर के बगल में रखें और हथेलियाँ जमीन की ओर रखें। -
02
गहरी सांस लेते हुए पेट की मांसपेशियों की सहायता से दोनों पैरों को 90 डिग्री तक ऊपर उठाएँ। -
03
सामान्य सांस लेते हुए हाथों की सहायता से कूल्हों और पीठ को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठाएँ। -
04
दोनों पैरों को सिर के ऊपर से पीछे ले जाएँ और प्रयास करें कि पैरों की उंगलियाँ जमीन को स्पर्श करें। पीठ को यथासंभव सीधा रखें। -
05
सामान्य रूप से सांस लेते हुए कुछ समय तक इसी स्थिति में बने रहें और शरीर को ढीला छोड़ें। -
06
सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कशेरुकाओं को क्रमवार जमीन पर लाते हुए दोनों पैरों को वापस प्रारंभिक स्थिति में ले आएँ। -
07
इस अभ्यास को 3 से 4 बार दोहराएँ।
हलासन के लाभ
- पीठ और गर्दन के दर्द में राहत देने में सहायक है।
- पाचन क्रिया सुधारकर गैस, कब्ज और अपच में लाभकारी है।
- थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करने तथा रक्त संचार सुधारने में सहायक है।
- पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने और मेटाबोलिज्म बेहतर करने में मदद करता है।
- मानसिक तनाव कम कर शरीर और मन को शांत करता है।
किन रोगों में लाभकारी / सहायक
- थायराइड एवं पैराथायराइड ग्रंथियों की समस्याओं में सहायक।
- डायबिटीज, अस्थमा एवं पाचन विकारों में लाभकारी।
- मेटाबोलिज्म सुधारने एवं पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में उपयोगी।
- सर्वाइकल जकड़न और पीठ दर्द में सहायक।
- माइग्रेन, सिरदर्द, तनाव, चिंता और अनिद्रा में लाभकारी।
- ब्रोंकाइटिस, अन्य श्वसन रोग, रजोनिवृत्ति के लक्षण एवं मासिक धर्म की अनियमितताओं में सहायक।
निषेध / सावधानियाँ
- स्लिप डिस्क, रीढ़ की गंभीर समस्या, सर्वाइकल की गंभीर समस्या, उच्च रक्तचाप, हर्निया, गर्भावस्था तथा मासिक धर्म के दौरान यह आसन न करें।
- किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में यह आसन डॉक्टर या योग विशेषज्ञ के परामर्श से ही करें।
Tip
हलासन में आते और वापस लौटते समय किसी प्रकार का झटका न दें। यदि शुरुआत में पैर जमीन तक न पहुँचें तो जितना सहज हो उतना ही करें और नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे पूर्ण मुद्रा प्राप्त करें।
Need Expert Guidance?
Our yoga experts are here to help you practice correctly and safely for maximum benefits.
Book an Appointment