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फोकस्ड ब्रीदिंग

श्वास जागरूकता (Breath Awareness) करने की विधि

  • 01
    सुखासन, पद्मासन, वज्रासन अथवा किसी आरामदायक कुर्सी पर बैठ जाएं। यदि बैठना संभव न हो तो पीठ के बल आराम से लेट जाएं। रीढ़ को यथासंभव सीधा रखें, आंखें कोमलता से बंद करें तथा दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें।
  • 02
    अब अपना पूरा ध्यान केवल नाक से भीतर आती और बाहर जाती सांस पर केन्द्रित करें। श्वास को बदलने या नियंत्रित करने का प्रयास न करें, केवल उसका सहज रूप से अवलोकन करें।
  • 03
    हर श्वास के साथ शरीर में होने वाली हलचल को महसूस करें। विशेष रूप से पेट का फूलना और सिकुड़ना, श्वास का भीतर जाना तथा बाहर आना पूरी जागरूकता के साथ अनुभव करें।
  • 04
    इस अभ्यास को प्रतिदिन लगभग 30 मिनट करें। आवश्यकता अनुसार इसे एक बार में 30 मिनट, दो बार 15-15 मिनट या तीन बार 10-10 मिनट में भी किया जा सकता है।
  • 05
    अभ्यास के दौरान मन में अनेक प्रकार के विचार आना स्वाभाविक है। उन्हें रोकने या हटाने का प्रयास न करें। केवल अपना ध्यान बार-बार सहज रूप से सांस पर वापस ले आएं।
  • 06
    जिस प्रकार एक चालक वाहन चलाते समय गाने सुन सकता है, किसी से बात कर सकता है अथवा आसपास की गतिविधियों को देख सकता है, फिर भी उसका मुख्य ध्यान वाहन चलाने पर ही रहता है; उसी प्रकार विचार आते-जाते रहें, लेकिन आपका मुख्य ध्यान केवल श्वास पर ही बना रहना चाहिए।
  • 07
    अभ्यास समाप्त होने पर कुछ क्षण शांत बैठें, अपने शरीर और मन में उत्पन्न शांति एवं स्थिरता का अनुभव करें, फिर धीरे-धीरे आंखें खोलें।

श्वास जागरूकता (Breath Awareness) के लाभ

  • यह मन को शांत करके मानसिक तनाव, चिंता और घबराहट को कम करने में अत्यंत प्रभावी है।
  • एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में सहायता करता है।
  • शरीर और मन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करता है।
  • तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करके गहरे विश्राम का अनुभव कराता है।
  • भावनात्मक संतुलन बनाए रखने तथा नकारात्मक विचारों को कम करने में सहायक है।
  • ध्यान (Meditation) एवं प्राणायाम के अभ्यास के लिए मन को तैयार करता है।
  • अनिद्रा, मानसिक थकान तथा अत्यधिक तनाव की स्थिति में लाभकारी है।
  • नियमित अभ्यास से धैर्य, आत्मनियंत्रण तथा मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है।

किन रोगों / स्थितियों में लाभकारी

  • मानसिक तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) तथा घबराहट में विशेष रूप से लाभकारी।
  • अनिद्रा (Insomnia) तथा मानसिक थकान में उपयोगी।
  • उच्च रक्तचाप के नियंत्रण में सहायक विश्राम अभ्यास।
  • डिप्रेशन के हल्के लक्षणों में मन को स्थिर करने में सहायक।
  • एकाग्रता की कमी, ध्यान भटकना तथा मानसिक अस्थिरता में उपयोगी।
  • योग, ध्यान एवं प्राणायाम के प्रारंभिक अभ्यास के रूप में अत्यंत लाभकारी।

सावधानियाँ

  • श्वास को जबरदस्ती लंबा, तेज या धीमा करने का प्रयास न करें।
  • अभ्यास के दौरान केवल श्वास का अवलोकन करें, उसे नियंत्रित करने का प्रयास न करें।
  • यदि चक्कर, बेचैनी या असुविधा महसूस हो तो अभ्यास रोक दें और सामान्य श्वास लें।
  • शांत, स्वच्छ एवं हवादार स्थान पर अभ्यास करना अधिक लाभकारी होता है।

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