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डी आर टी अर्थात डीप रेलेक्स्सेशन तकनीक (गहरी विश्राम विधि)

गहरी विश्राम विधि (DRT) की विधि

  • 01
    गहरी विश्राम विधि (Deep Relaxation Technique – DRT) के छह चरण हैं। प्रथम चरण में पांव के अंगूठे से कमर तक, द्वितीय चरण में कमर से कंधों तक, तृतीय चरण में कंधों से सिर तक, चतुर्थ चरण में पूरे शरीर में, पंचम चरण में चेतना द्वारा अपने शरीर का अवलोकन तथा षष्ठम चरण में आत्मा से परमात्मा तक की अनुभूति का अभ्यास किया जाता है।
  • 02
    शवासन में पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों के बीच लगभग 1 से 1½ फीट की दूरी रखें। दोनों हाथ कमर से लगभग 6–8 इंच की दूरी पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर रहें, सिर आरामदायक स्थिति में रखें तथा पूरे शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ दें।
  • 03
    अपना ध्यान दोनों पैरों के अंगूठों पर केन्द्रित करें। दोनों अंगूठों, तलवों, एड़ियों, टखनों, पिंडलियों, घुटनों, घुटनों के जोड़ों, जांघों तथा नितम्बों को क्रमशः शिथिल होने का सुझाव दें और प्रत्येक भाग में विश्राम का अनुभव करें।
  • 04
    अब कमर के पूरे भाग को ढीला छोड़ दें। पैरों के अंगूठों से लेकर कमर तक पूरे निचले शरीर में गहरी शिथिलता और विश्राम का अनुभव करें।
  • 05
    शरीर के निचले भाग में विश्राम को और गहरा करने के लिए ‘अ’ (अकार) की ध्वनि तीन बार करें। प्रत्येक ध्वनि के साथ पेट तथा निचले शरीर में उत्पन्न होने वाली कंपन तरंगों का अनुभव करें और उन्हें धीरे-धीरे शांत होने दें।
  • 06
    अब अपना ध्यान शरीर के मध्य भाग अर्थात कमर से कंधों तक ले जाएं। पीठ के सतह से स्पर्श, रीढ़ की हड्डी, प्रत्येक कशेरुका (Vertebra), पसलियों, फेफड़ों तथा पूरे मध्य भाग को क्रमशः शिथिल होने का सुझाव दें।
  • 07
    अब दोनों हाथों पर ध्यान केन्द्रित करें। उंगलियों के अग्रभाग, उंगलियों के जोड़, हथेलियां, कलाइयां, अग्रबाहु, कोहनियां, ऊपरी भुजाएं तथा दोनों कंधों के जोड़ों को पूर्ण विश्राम दें।
  • 08
    अब अपना ध्यान हृदय क्षेत्र पर केन्द्रित करें। पूरे सीने, हृदय तथा कमर से कंधों तक के पूरे शरीर में शिथिलता और गहरे विश्राम का अनुभव करें।
  • 09
    अब शरीर के मध्य भाग को और अधिक विश्राम देने के लिए ‘ऊ’ (ऊकार) की ध्वनि तीन बार करें। प्रत्येक ध्वनि की तरंगों को पूरे मध्य भाग में फैलता हुआ अनुभव करें और शरीर को और अधिक शांत होने दें।
  • 10
    अब तीसरे चरण में प्रवेश करें। अपना ध्यान गर्दन, स्वरयंत्र, जबड़े, जीभ, चेहरे की मांसपेशियों, आंखों, मस्तक तथा सिर के ऊपरी भाग पर केन्द्रित करें और प्रत्येक भाग को क्रमशः शिथिल होने का सुझाव देते हुए गहरे विश्राम का अनुभव करें।

  • 11
    अब शरीर के ऊपरी भाग में विश्राम की अनुभूति को और गहराई तक ले जाने के लिए ‘म’ (मकार) की ध्वनि तीन बार करें। प्रत्येक ध्वनि के साथ सिर, मस्तिष्क और पूरे ऊपरी भाग में उत्पन्न होने वाली कंपन तरंगों का अनुभव करें तथा उन्हें धीरे-धीरे शांत होने दें।
  • 12
    महसूस करें कि गर्दन, चेहरा, आंखें, मस्तक और सिर का प्रत्येक भाग पूर्ण रूप से शिथिल हो चुका है। मन धीरे-धीरे शांत, स्थिर और गहरे विश्राम की अवस्था में प्रवेश कर रहा है।
  • 13
    अब अभ्यास के चौथे चरण में प्रवेश करें। पैरों के अंगूठों से लेकर सिर के शीर्ष तक पूरे शरीर में एक साथ गहरे विश्राम का अनुभव करें।
  • 14
    अब अ… ऊ… म… (AUM) की संयुक्त ध्वनि तीन बार करें। प्रत्येक बार ध्वनि की तरंगों को पूरे शरीर में फैलता हुआ अनुभव करें और शरीर की प्रत्येक कोशिका को पूर्ण शांति एवं विश्राम में डूबने दें।
  • 15
    महसूस करें कि पूरा शरीर पूरी तरह शिथिल है, मन पूर्णतः शांत है तथा सम्पूर्ण अस्तित्व गहरी शांति और विश्राम की अवस्था में है।
  • 16
    अब अभ्यास के पाँचवें चरण में प्रवेश करें। अपनी चेतना को शरीर से बाहर अनुभव करें और ऐसा अनुभव करें कि आपकी चेतना बाहर से आपके पूरे शरीर को देख रही है। शरीर पूर्णतः शांत, स्थिर और विश्राम की अवस्था में है।
  • 17
    अनुभव करें कि शरीर अलग है और आपकी चेतना उसे बाहर से देख रही है। पूरे शरीर में गहरी शिथिलता, पूर्ण विश्राम और मौन का अनुभव करें।
  • 18
    अब अभ्यास के छठे चरण में प्रवेश करें। अपने चेतन स्वरूप का अनुभव करते हुए आत्मा से परमात्मा तक की अनुभूति करने का प्रयास करें। अपने चारों ओर असीम नीले आकाश का विस्तार महसूस करें तथा स्वयं को पूर्ण चेतना और शांति में स्थित अनुभव करें।
  • 19
    महसूस करें कि शरीर जड़ है और आत्मा चेतन है। दोनों को अलग-अलग अनुभव करें। पूर्ण विस्तार (Complete Expansion), गहरी शांति, मौन और परम विश्राम की अनुभूति करें।
  • 20
    अब अपने चेतन स्वरूप को पुनः शरीर में अनुभव करने के लिए ॐ (AUM) की ध्वनि करें। पूरे शरीर में उत्पन्न होने वाली कंपन तरंगों का अनुभव करें और धीरे-धीरे सामान्य चेतना में लौटने की तैयारी करें।

  • 21
    धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों के अंगूठों को हिलाएं। हाथों की उंगलियों के जोड़ों को भी धीरे-धीरे हिलाएं और अपने चेतन स्वरूप को पुनः अपने पूरे शरीर में अनुभव करें।
  • 22
    अपने पूरे शरीर का पुनः अनुभव करें। शरीर की प्रत्येक मांसपेशी में आई शिथिलता, मन की शांति तथा गहरे विश्राम का अनुभव करते रहें।
  • 23
    वापस आने के लिए दोनों एड़ियों को धीरे-धीरे आपस में मिला लें। ध्यान रखें कि विश्राम की अवस्था में किसी प्रकार की जल्दबाज़ी या बाधा न आए।
  • 24
    दाहिने हाथ को जमीन की सतह के सहारे धीरे-धीरे सिर के ऊपर ले जाएं। बाएं पैर को घुटने से मोड़ें और दाहिनी करवट लेते हुए बाएं हाथ की हथेली को छाती के सामने भूमि पर रखें।
  • 25
    दाहिने हाथ की हथेली को दाहिने कान के पास रखें। कुछ क्षण दाहिनी करवट में ही रुकें और शरीर में बने विश्राम तथा शांति के अनुभव को बनाए रखें।
  • 26
    अब दोनों हाथों की सहायता से बिना किसी झटके के धीरे-धीरे बैठने की अवस्था में आएं और शिथिल दण्डासन में कुछ समय तक विश्राम करें।
  • 27
    आंखें अभी भी बंद रखें। धीरे-धीरे अपनी सुविधा के अनुसार सुखासन, वज्रासन या पद्मासन में बैठ जाएं और पूरे शरीर में व्याप्त शांति, स्थिरता एवं विश्राम का अनुभव करते रहें।
  • 28
    जब पूर्ण रूप से सामान्य अनुभव होने लगे, तब धीरे-धीरे आंखें खोलें। इसी के साथ गहरी विश्राम विधि (Deep Relaxation Technique – DRT) का अभ्यास सम्पन्न होता है।

गहरी विश्राम विधि (DRT) के लाभ

  • शरीर की प्रत्येक मांसपेशी को गहन शिथिलता एवं विश्राम प्रदान करती है।
  • तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करके मानसिक तनाव, चिंता एवं थकान को कम करती है।
  • श्वसन की गति को संतुलित कर शरीर एवं मन में गहरी शांति का अनुभव कराती है।
  • एकाग्रता, आत्म-जागरूकता (Self-awareness) तथा ध्यान की क्षमता को बढ़ाती है।
  • हृदय गति एवं रक्तचाप को संतुलित करने में सहायक विश्राम तकनीक है।
  • शरीर, मन एवं चेतना के बीच सामंजस्य स्थापित करने में सहायता करती है।
  • योगाभ्यास के बाद रिकवरी, मानसिक विश्राम एवं ऊर्जा पुनः प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावी है।
  • गहरी शांति, सकारात्मकता तथा आंतरिक संतुलन का अनुभव कराती है।

किन रोगों / स्थितियों में लाभकारी

  • मानसिक तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) एवं अवसाद (Depression) में विशेष रूप से लाभकारी।
  • अनिद्रा (Insomnia), मानसिक थकान एवं शारीरिक थकावट को कम करने में सहायक।
  • उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) को नियंत्रित करने हेतु विश्राम तकनीक के रूप में उपयोगी।
  • माइग्रेन, तनावजनित सिरदर्द तथा गर्दन एवं कंधों की जकड़न में लाभकारी।
  • अस्थमा तथा अन्य श्वसन विकारों में श्वास को शांत एवं संतुलित करने में सहायक।
  • पाचन विकार, गैस, एसिडिटी एवं तनाव से संबंधित पेट की समस्याओं में उपयोगी।
  • हृदय रोगियों के लिए मानसिक शांति एवं तनाव कम करने वाली सहायक विश्राम तकनीक।
  • योगाभ्यास, प्राणायाम एवं ध्यान के बाद शरीर और मन को गहरे विश्राम में ले जाने के लिए अत्यंत उपयोगी।

निषेध / सावधानियाँ

  • पूरे अभ्यास के दौरान शरीर को पूरी तरह शिथिल रखें तथा किसी भी प्रकार का अनावश्यक तनाव न दें।
  • यदि कमर, गर्दन या रीढ़ की गंभीर चोट अथवा दर्द हो तो अभ्यास योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करें।
  • गर्भावस्था, हाल ही में हुई सर्जरी या किसी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति में अभ्यास से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • ध्वनि (अ, ऊ, म, ॐ) का उच्चारण अपनी क्षमता के अनुसार करें, किसी प्रकार का दबाव न बनाएं।
  • अभ्यास के अंत में सामान्य अवस्था में धीरे-धीरे लौटें, अचानक न उठें।

Tip

गहरी विश्राम विधि का सर्वोत्तम लाभ तब मिलता है जब प्रत्येक चरण को बिना जल्दबाज़ी, पूर्ण जागरूकता और सहज श्वास के साथ किया जाए। शरीर के प्रत्येक भाग में शिथिलता, ध्वनि की तरंगों तथा आंतरिक शांति का अनुभव करते हुए अभ्यास करें। योगाभ्यास के अंत में इस तकनीक का नियमित अभ्यास मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में अत्यंत प्रभावी होता है।

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