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उत्तान पादासन

उत्तानपादासन की विधि

  • 01
    पीठ के बल बिल्कुल सीधे लेट जाएं। दोनों पैरों को आपस में मिलाकर रखें और हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां फर्श की ओर रहें।
  • 02
    सांस लेते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे बिना मोड़े लगभग 60 डिग्री तक ऊपर उठाएं।
  • 03
    पैरों को सीधा रखते हुए सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • 04
    कुछ समय तक इसी स्थिति में बने रहें।
  • 05
    सांस छोड़ते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे नीचे लाकर जमीन पर टिकाएं।
  • 06
    अभ्यास के बीच कुछ क्षण विश्राम करें।
  • 07
    इसी प्रकार इस अभ्यास को लगभग 10 बार दोहराएं।

उत्तानपादासन के लाभ

  • पेट की चर्बी, तोंद और अतिरिक्त वजन कम करने में सहायक है।
  • कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को टोन एवं मजबूत करता है।
  • पाचन में सुधार कर कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच से राहत देता है।
  • नाभि खिसकने, रीढ़ तथा प्रजनन अंगों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
  • पैरों और पेट के हिस्से में रक्त संचार बढ़ाता है।
  • तंत्रिका तंत्र को शांत कर तनाव कम करने में सहायक है।

किन रोगों में लाभकारी / सहायक

  • कब्ज, अपच, गैस और एसिडिटी में विशेष रूप से लाभकारी।
  • डायबिटीज एवं पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में सहायक।
  • शौच से पहले 10–15 मिनट अभ्यास करने पर कब्ज में राहत देने में उपयोगी।
  • कमर दर्द एवं थायराइड संबंधी समस्याओं में सहायक।
  • आर्थराइटिस एवं प्रजनन संबंधी विकारों के उपचार में सहयोगी।

निषेध / सावधानियाँ

  • कमर दर्द, स्लिप डिस्क, हर्निया, उच्च रक्तचाप, मासिक धर्म तथा गर्भावस्था में यह आसन न करें।

Tip

पैरों को ऊपर उठाते और नीचे लाते समय झटका न दें। पूरे अभ्यास के दौरान कमर को जमीन से सटाकर रखें और पेट की मांसपेशियों को सक्रिय रखें।

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