अधो मुख श्वानासन
Adho Mukha Svanasanaरीढ़, कंधों और पैरों को मजबूत बनाता है तथा शरीर में लचीलापन बढ़ाने में सहायक है।
अर्ध चक्रासन
Ardha Chakrasanaपीठ, कमर और कंधों को खोलने में सहायक, शरीर की मुद्रा और लचीलापन सुधारने वाला आसन।
अर्ध उष्ट्रासन
Ardha Ushtrasanaछाती, पेट और जांघों में खिंचाव देकर रीढ़ की लचक बढ़ाता है तथा शरीर को सक्रिय बनाता है।
गरुड़ासन
Garudasanaसंतुलन, एकाग्रता और पैरों की मजबूती बढ़ाने वाला आसन, जो जोड़ों की सक्रियता में भी सहायक है।
हस्त पादांगुष्ठासन
Hasta Padangusthasanaपैरों, कूल्हों और पीठ में लचीलापन बढ़ाता है तथा संतुलन और शरीर नियंत्रण को बेहतर बनाता है।
कटि चक्रासन
Kati Chakrasanaकमर, पेट और रीढ़ को सक्रिय करता है, जकड़न कम करने और शरीर में स्फूर्ति लाने में सहायक है।
कोणासन
Konasanaकमर और साइड मसल्स में खिंचाव देकर शरीर की लचीलापन, संतुलन और पाचन क्रिया में सहायक है।
पाद-हस्तासन
Pada Hastasanaरीढ़, हैमस्ट्रिंग और पैरों में खिंचाव लाकर शरीर की जकड़न कम करता है और पाचन में सहायक है।
पार्श्व कोणासन
Parshva Konasanaपैरों, कमर और छाती को मजबूत व लचीला बनाता है तथा शरीर के संतुलन को बेहतर करता है।
सूर्य नमस्कार
Surya Namaskarपूरे शरीर को सक्रिय करने वाला समग्र अभ्यास, जो शक्ति, लचीलापन, सहनशक्ति और ऊर्जा बढ़ाता है।
ताड़ासन
Tadasanaशरीर की मुद्रा सुधारता है, संतुलन बढ़ाता है और पैरों, रीढ़ तथा कंधों को सक्रिय करने में सहायक है।
त्रिकोणासन
Trikonasanaकमर, जांघों और रीढ़ में खिंचाव देकर शरीर की लचक बढ़ाता है तथा पाचन व संतुलन में सहायक है।
ऊर्ध्व हस्तोत्तानासन
Urdhva Hastottanasanaशरीर को ऊपर की ओर खिंचाव देकर रीढ़, कंधों और पेट को सक्रिय करता है तथा ऊर्जा बढ़ाता है।
उत्कट कोणासन
Utkat Konasanaजांघों, कूल्हों और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत करता है तथा शरीर के निचले भाग की स्थिरता बढ़ाता है।
उत्कटासन
Utkatasanaजांघों, घुटनों और कूल्हों को मजबूत बनाता है तथा शरीर की सहनशक्ति और संतुलन बढ़ाता है।
वीर भद्रासन
Veer Bhadrasanaपैरों, कंधों और छाती को मजबूत करता है, संतुलन बढ़ाता है तथा शरीर में आत्मविश्वास और स्थिरता लाता है।
वृक्षासन
Vrikshasanaसंतुलन, एकाग्रता और पैरों की मजबूती बढ़ाने वाला आसन, जो शरीर को स्थिरता और लचीलापन देता है।
