कब्ज

कब्ज

कब्ज सब से आम पाचन विकार है जो सभी उम्र के व्यक्तियों को प्रभावित करता है और कई पुरानी बीमारियों का मुख्य कारण है। कब्ज बने रहने पर कुछ बीमारियों को ठीक करना असंभव हो जाता है। कब्ज को कठोर, सूखा या ढेलेदार मल, मल पास करते समय तनाव या दर्द के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। एक अहसास कि सभी मल पारित नहीं हुआ है, ऐसा महसूस होना कि मलाशय अवरुद्ध है, या मल पारित करने के लिए बहुत लंबा इंतजार करना आदि सभी कब्ज के लक्षण हैं । कब्ज एक जीवन शैली आधारित बीमारी है। आहार में फाइबर की कमी, अपर्याप्त पानी का सेवन और परिश्रम विहीन जीवन कब्ज के मुख्य कारण हैं। एलोपैथिक दवाओं के नियमित सेवन से भी कब्ज होता है।

              कब्ज आकस्मिक या पुराना हो सकता है। आकस्मिक कब्ज दिनचर्या में कुछ अनियमितताओं का परिणाम हो सकता है, देर रात तक जागना, गरिष्ठ भोजन करना, पार्टी, घर के बाहर भोजन, विशेष प्रकार की दावत आदि आकस्मिक कब्ज के कारण हो सकते हैं। जबकि पुराना कब्ज अस्वास्थ्यकर जीवन शैली, कुछ बीमारियां, कुछ दवाओं विशेष रूप से एलोपैथिक दवाओं के लंबे समय तक उपयोग का परिणाम हो सकता है।

             कब्ज को प्राकृतिक रूप से ठीक करने की आवश्यकता है। कब्ज के लिए साइड इफेक्ट के कारण एलोपैथिक दवाएं लेना नुकसान दायक होगा। जुलाब के उपयोग से निर्जलीकरण, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, गंभीर दस्त, चयापचय संबंधी विकार, पुरानी कब्ज, आंत में तरल पदार्थ के शुद्ध अवशोषण में कमी, आंतों की मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को कमजोर करने जैसी समस्याएं हो जाती हैं। मीठा सोडा जैसे कार्बोनेटेड पेय का सेवन करना एक अच्छा विचार नहीं है, क्योंकि इन पेय पदार्थों के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं और कब्ज को बदतर बना सकते हैं।

          पुरानी कब्ज को ठीक होने में अधिक समय लगता है और जीवन शैली में सुधार की आवश्यकता होती है जब कि आकस्मिक कब्ज आसानी से एक या दो दिन में ठीक हो जाता है, निवारक और उपचारात्मक उपाय का पालन करने से हर कोई इस बीमारी से मुक्त रहेगा।

  • गरिष्ठ भोजन, घर के बाहर भोजन करने या शादी आदि दावतों के 30 मिनट बाद पल्सेटिला 200 की दो खुराक 15-20 मिनट के अंतराल पर लें।
  • सप्ताह में एक बार पकाया हुए भोजन न करके केवल ताजे, मौसमी फल और सलाद का सेवन करें।
  • यदि आप किसी भी कारण से होटल आदि में भोजन करें तो साथ में लगभग 200 ग्राम दही अवश्य लें। और अधिक भोजन न करें।
  • नियमित रूप से महीने में एक बार, सुबह खाली पेट सल्फर 200 और उसी दिन रात को सोने से लगभग 30 मिनट पहले नक्स वोमिका 200 लें।
  • प्रकृतिक कच्चा शहद या काले नमक के साथ दिन में कम से कम एक बार ताजा नींबू पानी लें। दिन में एक से अधिक बार लेने पर भी कोई नुकसान नहीं होता है।
  • नियमित आदत के रूप में, रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले अपना रात का भोजन समाप्त कर लें।
  • अपने भोजन को अच्छी तरह से चबाएं और धीरे-धीरे खाएं। पेट पूरी तरह न भरें। भोजन के साथ पानी न पिएं बल्कि भोजन के डेढ से दो घंटे बाद पानी अवश्य पियें।
  • अपने सामान्य आहार में अनाज आदि को कम करके सलाद, अंकुरित अनाज, छाछ और फलों की पर्याप्त मात्रा को अपने आहार का हिस्सा बनाएं।
  • सूर्योदय से पहले सोकर उठें।
  • उठने पर दो गिलास सादा पानी पिएं। दिन में भी फ्रिज में रखे पानी का इस्तेमाल न करें। हर दिन कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।
  • अपने गेहूं के आटे में लगभग 20 प्रतिशत चोकर मिलाएं या गेहू के बजाए मोटे अनाज-बाजरा, ज्वार, जौ, चना, मक्का, आदि का उपयोग करें।
  • मैदा और बेसन से परहेज करें। पॉलिश किए हुए चावल की जगह ब्राउन राइस उपयोग करें।
  • नियमित रूप से भोजन में हरी सब्जियां, पत्तेदार सब्जियां, अधिक फाइबर वाली सब्जियां, कुछ मौसमी फल, सलाद, अंकुरित अनाज और छाछ शामिल करें। ऐसे खाद्य पदार्थ जो प्रकृति में गरिष्ठ हैं और पाचन में थोड़ा मुश्किल हैं (पनीर, राजमा, छोले, उड़द दाल, पाचन में भारी सब्जियां आदि कभी-कभी लिये जा सकते हैं लेकिन नियमित रूप से नहीं। पनीर से बचने की कोशिश करें, विशेष रूप से बाजार, बाहर, या रेस्तरां का पनीर या पैक किया हुआ पनीर।
  • व्यायाम करें और नियमित रूप से टहलें। अगर आपका कार्य या व्यवसाय देर तक बैठे रहने का है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
  • उत्तानपादासन, सर्वांगासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, ब्रजासन, बालासन, मत्स्यासन विशेष रूप से लाभकारी हैं। तीव्र कब्ज होने पर शौचालय जाने से पहले उत्तानपादासन, नौकासन और पवन मुक्तासन करें।
  • प्राकृतिक चिकित्सा आधारित सुझाव: त्रिफला का नियमित उपयोग निवारक और औषधि के रूप में हर दृष्टि से उत्कृष्ट है। एक प्राकृतिक रेचक होने के अलावा, यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरिया है और भोजन के उचित पाचन और अवशोषण को बढ़ावा दे सकता है, सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है, परिसंचरण में सुधार कर सकता है, पित्त नलिकाओं को आराम दे सकता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर होने से रोक सकता है, अंतःस्रावी तंत्र के होमियोस्टेसिस को बनाए रख सकता है और लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन के उत्पादन को बढ़ा सकता है। यह मोतियाबिंद, मैकुलर डिजनरेशन और उम्र से संबंधित दृष्टि समस्याओं सहित विभिन्न नेत्र रोगों को भी रोकता है। यह आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करता है और दृष्टि में सुधार करता है।

इस जादुई जड़ी बूटी से उचित लाभ प्राप्त करने के लिए इसे पाउडर, टैबलेट या कैप्सूल के रूप में न खरीदें बल्कि इसे अपने स्थूल रूप में खरीदें यानी साबुत या बहुत मोटा कुचला हुआ। हरड़ (हरितिका) एक भाग, बहेड़ा (बिभीतकी) दो भाग, और आंवला चार भाग- इसे 18-20 घंटे के लिए पत्थर या मिट्टी या चीनीमिट्टी के बर्तन में भिगो दें। एक मुलायम कपड़े (मलमल) से छान लें । पाचन तंत्र के कामकाज में सुधार के लिए सुबह खाली पेट एक गिलास पिएं। बिना किसी समस्या के भी इसे रोजाना निवारक के रूप में लेने में कोई बुराई नहीं है। त्रिफला के एक और गिलास पानी से अपनी आंखों को खुला रखकर अच्छी तरह धोएं। ऊपर बताए गए आंखों से संबंधित सभी लाभ पाने के लिए इसे नियमित रूप से करें। बाजार के खरीदे त्रिफाला पाउण्डर आदि के पानी से आंखे कदापि ना धोएं।

  • पपीता, अमरूद, अंजीर, अंगूर, बेल (फल जिनकी पत्तियों को भगवान शिव की पूजा के लिए चढ़ाया जाता है) पाचन संबंधी कई अन्य लाभों के अलावा कब्ज के लिए बहुत अच्छा प्राकृतिक उपाय हैं। इनमें से कम से कम एक या दो को अपने नियमित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए।
  • मुनक्का का उपयोग भी एक अच्छा प्राकृतिक रेचक है। आप इसे तीन तरीकों में से किसी एक तरह से ले सकते हैं। (ए) इसके बीज को हटाकर चबा सकते हैं, या (बी) इसके बीज हटाकर अंदर थोड़ा सा काला नमक और काली मिर्च लगाकर, थोड़ा सूखा भूनकर, या (सी) 7-8 मुनक्का लें, इसके बीज हटा दें, एक गिलास दूध में डालकर उबाल लें। यह एक छोटे गुलाब जामुन की तरह फूल जायेगा। दूध और यह मुनक्का दोनों लें।
  • एक और प्राकृतिक रेचक आरंडी है। आप रात को या तो आरंडी के 7-8 बीज छीलकर, थोड़ा कुचलकर दूध के साथ उबाल लें और उसे पी लें या गर्म दूध में आधा से एक छोटा चम्मच आरंडी का तेल डालकर पी लें।

आवश्यक होने पर ली जा सकने योग्य कुछ होम्योपैथिक औषधियां :-

  • सामान्यता Nux Vomica 200 रात को सोते समय। पुराने कब्ज की स्थिति में दिन में चार बार भी ले सकते हैं।
  • बड़ा, कड़ा मल, कष्टपूर्ण मलत्याग, चिपचिपा मल, मल त्याग करने में दर्द – Bryonia 30 या 200 
  • बिना मल त्याग किय सहज, मल त्याग के बाद असहज, मल का पहला भाग कड़ा, उसके बाद चिपचिपा और उसके बाद तरल- Calcarea Carb 30
  • बार-बार अपच, गैस बनना, पेट फूलना, मीठा खाने की तीव्र इच्छा – Lycopodium 30
  • गंभीर कब्ज, कई दिनों से मल त्याग न हुआ हो, पेट में दर्द और भारीपन हो — Kali mur 3X की 30–40 गोलियां गर्म पानी के साथ लें। यदि 30–40 मिनट में भी मल त्याग न हो तो इसी प्रकार एक खुराक और ले लें।