कैंसर

कैंसर

भोजन की आदतों में बदलाव के साथ-साथ जीवन शैली में बदलाव करेला और नीम चढ़ा की कहावत को चरितार्थ करता है और इस खतरनाक बीमारी के रूप में परिणाम देता है। यह इस हद तक फैल गया है कि लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति को जीवन काल के दौरान इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना रहती है। जो लोग खुद इस बीमारी से बच भी जाते हैं, उन्हें अपने कुछ करीबी लोगों को इस से पीड़ित देखना पड़ सकता है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान दावा करता है कि इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन कमोबेश यह केवल कुछ वर्षों के लिए रोगी को जीवित रखने में मदद करने में सक्षम है, और वास्तविक इलाज अभी भी बहुत दूर है। एक प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ ने अपने इलाज का सही वर्णन किया कि जैसे कोई अपराधी कुछ समय के लिए पुलिस या किसी अन्य खतरे को देखकर खुद को छिपा लेते हैं, लेकिन खतरा गायब होने पर फिर से प्रकट हो जाते हैं; कैंसर का रोग भी ठीक उसी प्रकार है जो उपचार से थोड़े समय के लिए दब जाते हैं।

कैंसर को पांच व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता हैः

1. कार्सिनोमाः इस प्रकार के कैंसर विशेष कर शरीर के आंतरिक और बाहरी हिस्सों जैसे फेफड़े, स्तन, नाक, प्रोस्टेट, मूत्राशय और पेट में होते हैं।

2.  सारकोमाः यह विशेषता हड्डी, उपास्थि, वसा, संयोजी ऊतक, मांसपेशी, और अन्य सहायक ऊतकों,  मांसपेशियों या रक्तवाहिकाओं में होता है।

3. लिम्फोमाः कैंसर जो लिम्फ नोड्स और प्रतिरक्षा प्रणाली के ऊतकों में शुरू होते हैं। अधिकांश लिम्फोमा दो मुख्य प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं जिन्हें लिम्फोसाइट्स कहा जाता हैः बी लिम्फोसाइट्स (बी कोशिकाएं) और टी लिम्फोसाइट्स (टी कोशिकाएं)। कैंसर कोशिकाएं शरीर के विभिन्न हिस्सों में फैल सकती हैं, जिनमें लिम्फ नोड्स, प्लीहा, अस्थिमज्जा, रक्त या अन्य अंग शामिल हैं। वहां से, वे जमा हो कर ट्यूमर बना सकती हैं।

4. ल्यूकीमियाः कैंसर जो अस्थि मज्जा में शुरू होते हैं और अक्सर रक्त प्रवाह में जमा होते हैं। यह अस्थिमज्जा और लसीका प्रणाली सहित शरीर के रक्त बनाने वाले ऊतकों में हो सकता है। ल्यूकेमिया रक्त कैंसर का एक समूह है जो शरीर की रक्त कोशिकाओं, मुख्य रूप से सफेद रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है। ल्यूकेमिया तब होता है जब सफेद रक्त कोशिकाएं उतनी नहीं बढ़ती जितना उन्हें बढ़ना चाहिए। यह कई प्रकार से बाहर निकलता है। सबसे आम प्रकार हैं :

  • नया या क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (ALL) या (CLL)
  • नया या क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (AML) या (CML)

5. एडेनोमासः कैंसर जो थायरॉयड, पिट्यूटरी ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि आदि में उत्पन्न होते हैं।
ग्रंथियों के ऊतक में विभिन्न प्रकार के एडेनोमा शामिल हैंः

  • अधिवृक्क एडेनोमा अधिवृक्क ग्रंथियों में बढ़ता है।
  • कुछ बृहदान्त्र पॉलीप्स (बृहदान्त्र के अस्तर में वृद्धि) एडेनोमा हैं।
  • पैराथाइरॉइड एडेनोमा पैराथायरायड ग्रंथि में बढ़ता है।
  • पिट्यूटरी एडेनोमा पिट्यूटरी ग्रंथि में बढ़ता है।
  • प्लियोमॉर्फिक एडेनोमा लार ग्रंथियों में बढ़ता है ।
उपलब्ध उपचार : सामान्य विवरण
तथाकथित आधुनिक उन्नत चिकित्सा विज्ञान के अनुसार अच्छी तरह से स्थापित उपचार निम्नलिखित हैं।
  • कीमोथेरेपी एक प्रकार का कैंसर उपचार है जो कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का उपयोग करता है।
  • हार्मोनथेरेपी एक ऐसा उपचार है जो स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के विकास को धीमा करता या रोकता है।
  • हाइपरथर्मिया एक प्रकार का उपचार है जिसमें शरीर के ऊतकों को 113 डिग्री फ़ारेनहाइट तक गर्म किया जाता है ताकि कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने और मारने में मदद मिल सके। ये कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ सामान्य ऊतक को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
  • इम्यूनोथेरेपी एक प्रकार का कैंसर उपचार है जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करता है।
  • फोटोडायनामिक यह थेरेपी कैंसर और अन्य असामान्य कोशिकाओं को मारने के लिए प्रकाश द्वारा सक्रिय दवा का उपयोग करती है।
  • विकिरण चिकित्सा एक प्रकार का कैंसर उपचार है जो कैंसर कोशिकाओं को मारने और ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए विकिरण की उच्च खुराक का उपयोग करता है।
  • स्टेमसेल प्रत्यारोपण ऐसी प्रक्रियाएं हैं जो स्टेम कोशिकाओं को बहाल करती हैं जो उन लोगों में रक्त कोशिकाओं को बढ़ाती हैं जिन्हें कीमोथेरेपी या विकिरण चिकित्सा की उच्च खुराक से नष्ट कर दिया गया है।
  • सर्जरी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक सर्जन शरीर से कैंसर को निकालता है।
  • लक्षित चिकित्सा एक प्रकार का कैंसर उपचार है जो कैंसर कोशिकाओं में हुए उस परिवर्तन को लक्षित करता है जो उन्हें बढ़ने, विभाजित करने और फैलने में मदद करता है।

 हालांकि, हमारी राय में, आधुनिक विज्ञान अभी तक इस बीमारी का समाधान नहीं ढूंढ पाया है और इन सभी उपचारों के गंभीर दुष्प्रभाव हैं, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह लक्षित कोशिकाओं के साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी मारता है। कैंसर कोशिकाएं वह स्थान और पोषक तत्व ले लेती हैं जो स्वस्थ अंगो को उपयोग करना होता है। नतीजतन, स्वस्थ अंगो का कार्य प्रभावित हो जाता है। ज्यादातर लोग, उपचार की जटिलताओं के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। अन्यथा भी, इन उपचारों के साथ कोशिकाओं के व्यवहार में परिवर्तन के मूल कारण की जाँच नहीं की जाती है जो नई कोशिकाओं के असामान्य व्यवहार को रोक सकती थी; और इस प्रकार पुनरावृत्ति की संभावना को ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। इन सभी उपचारों से बस कुछ वर्षों के लिए जीवन बचाया जा सकता है। अगर रोगी इन उपचारों से नहीं गुजरा होता, और बिना इलाज के ही रह जाता, तो शायद वह इस तरह के उपचार की तुलना में कुछ और वर्षों तक जीवित रहता। इसलिए, बहुत से लोग कहते हैं कि अधिकांश कैंसर रोगी रोग के बजाय उस के उपचार से मर जाते हैं।

श्री क्रिस्टीना इवारोन ने अपने लेख- “कैंसर का इलाज रोकने के लिए सलाह देना एक कठिन निर्णय हैं’’- जिसकी चिकित्सकीय समीक्षा थॉमस लेब्लैंक, MD,MA,MHS,FAAHPM, FASCO द्वारा की गई है- लिखते हैं“ कैंसर का उपचार हमेशा काम नहीं करता है, और यह अवांछित दुष्प्रभाव पैदा करता है और जीवन की गुणवत्ता को भी कम करता है। कैंसर के इलाज को रोकने का निर्णय एक कठिन कार्य है। आपका डॉक्टर संभवतः आपके जीवन का अन्त होने की स्थिति को भाप कर उन जोखिमों और दुष्प्रभावों पर चर्चा करेगा जो आप अनुभव कर सकते हैं, साथ ही अन्य प्रकार की चिकित्साओ के बारे में बतायेगा जो आपके संक्रमण में आपकी मदद कर सकते हैं। “

इस उद्धरण के साथ, हम बस यह कहना चाहते हैं कि उन्नत देशों में भी कैंसर विशेषज्ञ जानते हैं कि उनके उपचार पूर्णतः विश्वासनीय नहीं हैं और रोगी के जीवन की सहजता कम करना जैसे गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं। जब कि अन्य उपचार भी हैं जो काम करते हैं। फिर भी ये डॉक्टर उन उपचारों को याद तब करते हैं जब उन्हें लगता है कि रोगी का जीवन दांव पर है और रोग उनकी चिकित्सा सीमा से बाहर जा चुका है, उससे पहले नहीं। मुझे याद है कि जब मैं चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन कर रहा था तब एक चिकित्सा संगोष्ठी में एक प्रसिद्ध एलोपैथ ने कहा था “होम्योपैथिक दवाओं की कार्रवाई उस बिंदु से शुरू होती है जहां एलोपैथिक दवाओं की कार्रवाई समाप्त हो जाती है“ भारत के चिकित्सा क्षेत्र के साथ-साथ अच्छी तरह से उन्नत देशों के भी ऐसे विचारों को उद्धृत किया जा सकता है जहां कई कैंसर विशेषज्ञों ने भी इन उपचारों और उनके दुष्प्रभावों के साथ सफलता की अनिश्चितता के बारे में राय दी है। यहां हमारा उद्देश्य इन मुद्दों पर बहस करना नहीं है, बल्कि बस इन तथ्यों को भी आपके सामने लाना है ताकि आप अपने इलाज के बारे में उचित निर्णय ले सकें।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन ने एक सर्वेक्षण किया जिसमें विश्व के माने हुए 1081 ऑन्कोलॉजिस्ट्स से एक प्रश्न पूछा गया – यदि आपके परिवार में किसी को कैंसर हो जाए, तो क्या आप कीमोथेरेपी और रेडिएशन आदि से चिकित्सा करेंगे? बिल्कुल आच्चर्य रूप से 88.3% का उत्तर था: बिल्कुल नहीं। यह सर्वेक्षण PLOS ONE (Public Library of Science) नाम की पत्रिका के 28 मई 2014 के संस्करण में छापा गया। PLOS ONE पुरस्कार प्राप्त ऐसी पत्रिका है जो केवल ओरिजिनल अनुसन्धान सम्बन्धी लेख और समाचार आदि छापती है।

इसी प्रकार का एक और सर्वेक्षण 1989 में भी 790 डॉक्टरों पर किया गया था (संदर्भ: अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की पत्रिका)।

यह बार-बार साबित हो चुका है कि कीमोथेरेपी की सफलता दर बहुत कम है (लगभग 2%) और यह भी कि यह दवाएं बहुत ज़हरीली होती हैं (संदर्भ: 14 वर्षों की स्टडी का परिणाम जो 2004 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑनकोलॉजी में छपा)।

 

कीमो के साइड इफेक्ट्स से परेशान डॉक्टर अब लिवर, लंग्स के रोगियों को इम्युनो-टारगेटेड थेरेपी दे रहे हैं। इम्यूनो-टारगेटेड थेरेपी के साइड इफेक्ट जीवन के लिए आवश्यक अंगों की सूजन से लेकर लाइफ थ्रेटनिंग तक कुछ भी हो सकते हैं (संदर्भ: कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट; अमेरिकन कैंसर सोसाइटी आदि अनेक)।

हमारी एकीकृत उन्नत होम्योपैथी कुछ हद तक बीमारी को ठीक करने में सक्षम है। जैसा कि सर्वविदित है, उपचार की सफलता इसकी शुरुआती पहचान में निहित है। जब तक बीमारी का प्रसार उन्नत या मेटास्टैटिक चरण तक नहीं पहुंचा है, तब तक पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की एक अच्छी सम्भावना होती है। लेकिन अगर प्रसार मेटास्टैटिक चरण के स्तर तक पहुंच चुका है, तो हम बस दर्द में राहत, जीवन की गुणवत्ता में सुधार तथा जीवन काल को लम्बा करने की उम्मीद कर सकते हैं। उचित इलाज कई कारकों पर निर्भर करेगा, लेकिन भले ही जीवन बचाना असम्भव हो चुका हो, हमारी एकीकृत थेरेपी से पारंपरिक आधुनिक उपचारों के मुकाबले कम से कम मृत्यु का शांतिपूर्ण होना सुनिश्चित हैं। यदि जल्दी निदान किया जाता है और उपचार शुरू किया जाता है, तो कीमोथेरेपी, लेजर थेरेपी और अन्य साधनों की तुलना में हमारी एकीकृत उन्नत होम्योपैथी आदि आधारित उपचार से पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की सम्भावना अपेक्षा कृत बेहतर, अधिक और तीव्र (जल्दी) है।

एक बात और, इन उपचारों के दौरान और बाद में भी आपका ऑन्कोलॉजिस्ट कुछ आहार प्रतिबंधों और भ्रमण व्यायाम आदि की भी सलाह देगा जो उनके उपचारों का भी अभिन्न अंग होगा, जिसका आपको पालन भी करना होगा और साथ में औषधियों के साइड इफेक्ट्स भी अवश्य होंगे, जब कि हमारी एकीकृत वैकल्पिक चिकित्सा में, कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा । हालांकि हमारी चिकित्सा में योग और प्राणायाम भी शामिल होंगे जो हमारी होम्योपैथिक दवाओं के तेजी से काम करने में मदद करेंगे और आपको सम्पूर्ण स्वस्थ्य कल्याण की ओर ले जाएंगे। बेशक, हमारे आहार प्रतिबंध भी निश्चित रूप से होंगे लेकिन एलोपैथी के आहार प्रतिबिम्बो से अलग होंगे। उदाहरण के लिए, ऑन्कोलॉजिस्ट कह सकता है “बहुत सारे तरल पदार्थ (लेकिन कोई फल और फलों का रस नहीं) और तरल पदार्थ के नाम पर आपको वायुयुक्त पेय लिम्का, फैंटा आदि की पेशकश कर सकते हैं। जबकि हम कहेंगे कि वायुयुक्त पेय बिल्कुल नहीं बल्कि अन्य प्रकृतिक तरल पदार्थ जैसे फलों का रस, नारियल पानी, छाछ आदि । इसका कारण यह है कि कैंसर रोगी का शरीर पहले से ही अत्यन्त अम्लीय होगा जिसके बिना यह बीमारी नहीं हो सकती थी और वायुयुक्त पेय अत्यधिक अम्लीय होते हैं। इसलिए, सभी अम्लीय भोजन को ठीक होने के लिए पूरी तरह से भूलना होगा।

आगे बढ़ने से पहले यहां एक सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न को संबोधित करना भी प्रासंगिक हो सकता है, क्या कीमोथेरेपी और होम्योपैथी को एक साथ लिया जा सकता है? और मेरा जवाब एक बहुत बड़ा ‘नहीं’ है. कारण बहुत सरल है कि कीमोथेरेपी पूरी तरह से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना कम कर देगी जिससे यह लगभग शून्य हो जाएगी, जबकि होम्योपैथी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कार्य करती है। इस प्रकार दोनों उपचारों का दृष्टिकोण ठीक विपरीत है। इसलिए होम्योपैथी कीमोथेरेपी के साथ आपकी बिल्कुल भी मदद नहीं कर सकती है। आपको इनमें से केवल एक को चुनना होगा। हालांकि, कुछ होम्योपैथिक डॉक्टरों का दावा है कि वे कीमोथेरेपी के साथ रिकवरी में मदद कर सकते हैं लेकिन हमारी राय में यह केवल इसलिए है क्योंकि उन्होंने अपने पेशे का व्यवसायीकरण कर लिया है। आप निश्चित रूप से होम्योपैथी और सबंधित उपचारों को या तो कीमोथेरेपी से पहले या बाद में चुन सकते हैं लेकिन एक साथ नहीं। कैंसर की एलोपैथिक दवाएं इतनी अधिक सशक्त और गंभीर दुष्प्रभाव कारक हैं कि होम्योपैथी पर खर्च किया गया पैसा सरासर अपव्यय होगा। होम्योपैथी और संबम्धित उपचार आपको कीमोथेरेपी की तुलना में सफल इलाज और अधिक जीवित रहने की कई गुना बेहतर संभावनाओं को सुनिश्चित करते हैं यदि पहले विकल्प के रूप में चुना जाये। जब कि, कीमोथेरेपी के बाद, यह उपचार के दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं, लेकिन एक साथ नहीं।

कैंसर उपचार के प्रति हमारा दृष्टिकोण

इस बीमारी के लिए होम्योपैथिक दवाओं के चयन की प्रक्रिया बहुत कठिन, बोझिल और समय लेने वाली होने के कारण, इसके लिए प्रभावी दवाओं का उल्लेख यहां नहीं किया जा सकता है और रोगी को सलाह दी जाती है कि वे हमें विशिष्ट परामर्श के लिए लिखें, अन्य सामान्य उपाय नीचे दिए गए हैं जिन्हें किसी भी दवा की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत शुरू किया जा सकता है।

  • सबसे पहले, जीवन पर अत्यधिक सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। किसी भी तरह की नकारात्मकता को अपने से दूर रखें। यह रोग प्रकृति के उल्लंघन का परिणाम है और प्रकृति उन सभी को क्षमा कर देती है जो उसकी शरण लेते हैं और सच्चे दिल से इसका पालन करना शुरू कर देते हैं।
  • ॐ, गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। दिन में कई घंटे गाय के घी का दीया जलाते रहें। भीमसेनी कपूर को अच्छी क्वालिटी के बखूर बर्नर में जलाएं। अपने आंगन, बालकनी या कमरे में भी कुछ अच्छे पौधे लगाएं। अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, तुलसी, रबरप्लांट, स्नेकप्लांट, स्पाइडरप्लांट, मनीप्लांट आदि अच्छी मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ते हैं और इन्हें गमलो में भी उगाया जा सकता है। इनमे से कुछ रात्रि में भी आक्सीजन ही छोड़ते है और बिना धूप के बेडरूम में भी उगाये जा सकते हैं।
  • शराब, तंबाकू, धूम्रपान, नॉनवेज, मिठाई, चीनी, जंकफूड, प्रोसेस्डफूड, डिब्बाबंद भोजन और पेय, उपयोग के लिए तैयार भोजन, बासी भोजन, संरक्षित भोजन, पॉलिश किया हुआ अनाज, तला हुआ भोजन, फ्रिज वाला भोजन, वायुयुक्त पेय, चाय, कॉफी, अचार, पापड़ आदि को पूरी तरह से बंद कर दें।
  • नमक को भी पूरी तरह से बंद कर दें। पके हुए भोजन के बजाए सलाद, हरी सब्जियां उनका रस, खीरा और इसके रस, फलों और फलों के रस को स्वीकारने और उनकी आदत बनाने से आप अपने आहार में नमक और चीनी दोनों की कमी महसूस नहीं करेंगे। सभी फलों में स्वाभाविक रूप से कुछ नमक और चीनी होती है जो आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगी और सभी पोषक तत्वों की शरीर की आवश्यकता को पूरा भी करेगी।
  • तरल पदार्थ, कच्चे शहद के साथ नींबू पानी, नारियल पानी, ताजे फलों का रस, गाय का दूध, मठ्ठा (छाछ), हरी सब्जियों का रस, आदि खूब पिएं। कुछ भीगे हुए बादाम भी लें।
  • 50 मिली आंवले का रस, 50 मिली एलोवेरा रस, 50 मिली व्हीटग्रास का रस, 20 मिली गिलोय का रस, 8-10 कोमल नीम की पत्ती का पेस्ट और 8-10 तुलसी के पत्तों का पेस्ट मिलाकर रोजाना दो बार खाली पेट पिएं। स्वाद के लिए, इसमें कुछ ताजा नींबू की बूंदें मिलाई जा सकती हैं। रक्त कैंसर से पीड़ित रोगी को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बजाय उन्हें बस नीम के कोमल पत्ते और तुलसी के पत्ते लेने चाहिए। उन्हें या तो इसे चबाना चाहिए या पेस्ट बनाकर, कच्चे शहद में मिला कर इसे उंगली से चाट लेना चाहिए। ब्लड कैंसर के अलावा अन्य कैंसर के रोगी भी जो किसी कारण से उपरोक्त रस की व्यवस्था नहीं कर सकें इसका सेवन कर सकते हैं।
  • खट्टे फल (सिट्रस फल) खूब लें। यह एक भ्रम है कि खट्टे फल (सिट्रस फल) प्रकृति में अम्लीय होते हैं। बेशक, ये अम्लीय होते हैं लेकिन पाचन के बाद वे निश्चित रूप से एक क्षारीय राख छोड़ते हैं, इसलिए इसे भरपूर मात्रा में लिया जाना चाहिए।
  • हरी सब्जी का मतलब है लौकी, परवल, टिंडा, तोरई, करेला, गाजर, चुकंदर, पत्तागोभी, शलजम, मूली, सभी पत्तेदार सब्जियां, आदि ये सब कैंसर रोगी के लिए अच्छे हैं।
  • कैंसर रोगी के लिए अनुशंसित फल स्ट्रॉबेरी, चेरी, नींबू, टमाटर, संतरा, मौसमी, पपीता, अंगूर, सेब, नाशपाती, अनार, तरबूज, खरबूजा, लीची आदि हैं।
  • टहलें और नियमित रूप से हल्के व्यायाम करें। साथ ही नियमित रूप से प्राणायाम और योग करें।
    प्राणायाम – भस्त्रिका, कपालभाती, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, शीतली, उज्जयी और उदगीथ
    योगासन- सूर्यनमस्कार, पवनमुक्तासन, गोमुखासन, मरकटासन, वकरासन, मंडूकासन, भुजंगासन, उत्तानपादासन, सेतुबंधनासन, शवासन।