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सौम्य रॉ (कच्चा) शहद

सौम्य रॉ (कच्चा) शहद

शहद एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत है जो ग्लूकोज की तुलना में अधिक और तेज़ ऊर्जा देता है। शहद मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस से बनाया जाता है जिसमें कई चिकित्सीय गुण होते हैं, जैसे कि जीवाणुरोधी, प्रीबायोटिक, एंटीऑक्सीडेंट (जैसे कि फ्लेवोनोइड्स और फेलोनिक एसिड जो समय से पहले बुढ़ापा, टाइप 2 मधुमेह और हृदय रोगों को रोकते हैं ), और एंटीम्यूटाजेनिक। यह प्राकृतिक उत्पाद एक जलीय सुपरसैचुरेटेड घोल है, जो मुख्य रूप से फ्रुक्टोज और ग्लूकोज और अन्य छोटे घटकों, जैसे कि कार्बनिक अम्ल, अमीनो एसिड, प्रोटीन, खनिज, विटामिन, लिपिड, सुगंध यौगिक, फ्लोवोनोइड्स, पिगमेंट, मोम, पराग कण, कई एंजाइम और अन्य फाइटोकेमिकल्स से बना है।

       शहद एक प्राकृतिक स्वीटनर है जिसमें वसा नहीं होती है और प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है। यह विटामिन और खनिजो का एक महत्वपूर्ण आहार स्रोत है। यह पॉलीफेनोज नामक स्वास्थ्य प्रदान करने वाला पाधों के यौगिकों से भरपूर है। यह मेटाबोलिक सिंड्रोम से बचाता है और एडिपोनेक्टिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है – एक हार्मोन जो सूजन को कम करता है और रक्त शर्करा विनियमन में सुधार करता है। शहद रक्तचाप को कम करने, रक्त वसा का स्तर को बेहतर बनाने, दिल की धड़कन को नियंत्रित करने और स्वस्थ्य कोशिकाओं की मृत्यु को रोकने में मदद कर सकता है-ये सभी कारक हृदय के कार्य और स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। कच्चे शहद में आमतौर पर प्रोपोलिस होता है जिसे मधुमक्खियां राल बनाने वाले या इसी प्रकार के पौधों से संग्रहित करती हैं। प्रोपोलिस कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर में सुधार करता है; यह आंशिक-मोटाई वाले जलने और सर्जरी के बाद सवंमित हो गए घावों को ठीक करने में सबसे प्रभावी है। ये उपचार शक्तियाँ उनके जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी प्रभावों से आती हैं। शहद कुछ खास खांसी की दवाओं से ज्याद प्रभावी होता है।

          शहद बनाने के लिए मधुमक्खियाँ मीठा रस इक्ट्ठा करने के लिए फूलों पर जाती है। अपने छत्ते के पास फूल होने के बावजूद वे 4 किमी तक उड़ सकती हैं और आस-पास के फूलों के अलावा अन्य फूलों से रस इक्ट्ठा कर सकती हैं। फिर श्रमिक मधुमक्खियाँ उस रस को एक विशेष शहद पेट में संग्रहित करती हैं, पानी की मात्रा कम करने के लिए इसे एंजाइम के साथ मिलाती हैं। छत्ते में वापस आने के बाद, और श्रमिक मधुमक्खियाँ शहद को चबाना शुरू कर देती हैं ताकि इसे और अधिक एंजाइम के साथ मिलाया जा सके। इस प्रक्रिया से एक सरल सिरप बनता है। फिर मधुमक्खियाँ इसे शहद के छत्ते के सेल में रखती हैं। एक बार जब सिरप सेल में होता है, तो मधुमक्खियाँ इसे सूखने और गाढ़ा करने में मदद करने के लिए अपने पंखों से इसे पंखा करती हैं। अंत में, एक मधुमक्खी सेल को मोम से ढक देती हैं, इसे बाद में खाने या कटाई के लिए सुरक्षित रूप से संग्रहित करती है। इस प्रकार, शहद बनाने की प्रक्रिया में कई चरण होते हैं। जैसे कि मधुमक्खियाँ अपना भोजन कहाँ से इक्ट्ठा करती है, उस स्थान की जलवायु और मौसम, जिस फूल से रस इक्ट्ठा किया जाता है उसका प्रकार और छत्ते की स्थिति सभी मधुमक्खियों और उनके काम को प्रभावित करते है। इस प्रकार, शहद का रंग, बनावट, स्वाद और गाढापन एक बैच से दूसरे बैच में भिन्न होगा।

        शहद में मौजूद प्राकृतिक शर्करा (ग्लूकोज और फ्रुक्टोज) आपस में बंध जाती हैं और छोटे-छोटे क्रिस्टल बनाने लगती हैं, जिससे शहद सख्त होने लगता है। अलग-अलग मिश्रणों के साथ, कुछ शहद दूसरों की तुलना में तेजी से क्रिस्टीकृत होने लगते हैं। शहद में मौजूद पराग इस बंधन प्रक्रिया को बढ़ाता है और क्रिस्टीलीकरण प्रक्रिया के लिए एक मंच प्रदान करता है। मधुमक्खियां शहद बनाते समय जानबूझकर पराग का उपयोग नहीं करती हैं, लेकिन जब वे प्रत्येक फूल पर जाती हैं तो पराग का पाउडर उनके शरीर पर चिपक जाता है और अनिवार्य रूप से छत्ते की कोशिकाओं में समा जाता है। सौभाग्य से, पराग कण और अन्य खामियां कच्चे शहद के प्राकृतिक और स्वस्थ्य भाग हैं। वे शहद के कई लाभों के स्रोत भी हैं, जैसे कि एंटीऑक्सिडेंट, एंजाइम और सूजन-रोधी गुण। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक संग्रहीत शहद का रंग गहरा हो सकता है और इसकी सुगंध और स्वाद कम हो सकता है।

      शुद्ध शहद की प्राकृतिक घटना (समय के साथ क्रिस्टलीकरण और रंग परिर्वतन) के बारे में जागरूकता की कमी के कारण उपभोक्ताओं को लगता है कि वे जो शहद खा रहे हैं, उसकी गुणवत्ता खराब है और उसमें मिलावट है। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों ने (उपभोक्ताओं को शिक्षित करने के बजाय) भोले-भाले उपभोक्ताओं की इस सोच को दूर करने के लिए शहद का प्रसंस्करण करना शुरू कर दिया। प्रसंस्करण के दौरान, शहद को पाश्चुरीकृत किया जाता है। यह शहद को अत्यधिक तापमान पर गर्म करने की प्रक्रिया है, जो इसके अंदर मौजूद सूक्ष्मजीवों, जैसे कि खमीर या बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है। इतना ही नहीं, बल्कि पाश्चुरीकरण शहद के कई बेहतरीन गुणों को भी नष्ट कर देता है, जैसे कि इसके प्राकृतिक एंजीऑक्सीडेंट और पराग या छत्ते के टुकड़े। इन तत्वों के बिना, इसके प्राकृतिक पोषक तत्व और लाभ समाप्त हो जाते हैं। यह नियमित चीनी जितना ही हो जाता है, जिसके सेवन से शहद का कोई लाभ नहीं होता है और यह पैसे की बर्बादी बन जाता है। दूसरी ओर, कच्चे शहद को कभी भी पाश्चुरीकृत नहीं किया जाता है। मधुमक्खी पालक अपने शहद को नरम और पतले सूती कपड़े (मलमल) से छानकर उसमें कुछ प्राकृतिक मलबे को हटा देते हैं। फिर भी, सभी अनूठी और लाभकारी विशेषताएँ बरकरार रहती हैं। अगर यह क्रिस्टलीकृत हो जाता है, तो इसका मतलब है कि आपका शहद 100 प्रतिशत शुद्ध और मिलावट रहित है। सर्दियों में या गर्मियों में भी, अगर शहद को एयर-कंडीशन वाले कमरे या फ्रिज में रखा जाता है, तो क्रिस्टलीकरण बहुत आम है। वैसे भी, अलग-अलग फूलों के रस से क्रिस्टलीकरण की अलग-अलग समय-सीमा होती है; कुछ ठोस भी हो सकते है।

    अगर शहद क्रिस्टलीकृत हो जाए तो क्या करें? चिंता की कोई बात नहीं है। अगर आप इसे तरल बनाना चाहते हैं, तो शहद के जार को कुछ घंटो के लिए सीधी धूप में रखें; यह तरल हो जाएगा। अगर सीधी धूप आपकी पहुँच से बाहर है, तो जार को कुछ समय के लिए गर्म पानी में रखें, लेकिन इसे कभी भी सीधे आग पर गर्म न करें। जार को उबलते पानी में आग पर या ओवन/माइक्रोवेव में न रखें। इसे गर्म करने से इसके सभी निहित लाभ नष्ट हो जाएँगे और इसका कोई औषधीय उपयोग नहीं रह जाएगा। इसे ठोस रूप में भी खाने से कोई नुकसान नहीं हैं, क्योंकि क्रिस्टलीकृत शहद में भी इसके सभी पोषक गुण बने रहते हैं।

  स्वास्थ्य भंडार का कच्चा शहद हिमालय के प्राकृतिक जंगलों से एकत्रित किया गया है। यह बहु-फूलों वाला और जैविक हैं, जिसमें सुपर-क्वलिटी वाले 100 प्रतिशत शुद्ध शहद के सभी लाभ हैं। हमने इसे सभी पहलुओं से पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद, केवल अपने रोगियों की सुविधा और लाभ के लिए, बहुत प्रयास से खरीदा है।

         * वर्तमान में, यह प्रमाणित जैविक नहीं है, लेकिन प्राकृतिक जंगलों से होने के कारण यह निहित रूप से जैविक है और इसके अतिरिक्त, इसे एक प्रयोगशाला में परीक्षण करने पर जैविक पाया गया है जो कि थ्ै।प्ए ।च्म्क्। और त्ैव्ब्। द्वारा विधिवत मान्यता प्राप्त है।
सौम्य रॉ हनी

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