हृदय अवरोध क्या है:

हृदय अवरोध का अर्थ है हृदय की धमनियों (arteries जो हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाती हैं) की अंदरूनी दीवारों में प्लाक (Plaque) का जमा होना । चिकित्सकीय भाषा में इसे एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है। यह एक दीर्घकालिक सूजन (chronic inflammatory disease) है, जो लगभग 50% मौतों का कारण बनती है और अधिकांश हृदय रोगों की मुख्य वजह मानी जाती है।

प्लाक की संरचना:

प्लाक एक जटिल मिश्रण होता है, जिसमें शामिल हैं:

  • वसा (LDL कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स)
  • कोशिकीय अपशिष्ट (cellular waste)
  • कैल्शियम
  • फाइब्रिन
  • अन्य मलबा

यह धीरे-धीरे धमनियों की दीवारों में जमा होता है और समय के साथ इसमें वसा की मात्रा बढ़ती जाती है।

प्लाक के प्रकार:

  1. सॉफ्ट प्लाक (Soft Plaque):
  • वसा और मैक्रोफेज (WBC) से भरपूर
  • अधिक खतरनाक क्योंकि यह फट सकता है
  1. कैल्सीफाइड प्लाक (Calcified Plaque):
  • कैल्शियम जमने से कठोर
  • स्थिर होता है, लेकिन धमनियों की लचीलापन कम करता है

प्लाक बनने का कारण:

हमारी सभी रक्त वाहिकाओं में एक पतली परत होती है जिसे एंडोथीलियम (Endothelium) कहते हैं।

  • यह रक्त वाहिकाओं का “मस्तिष्क” माना जाता है
  • यह नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) बनाता है, जो धमनियों को लचीला रखता है
  • यह रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है

जब एंडोथीलियम को सही पोषण नहीं मिलता, तो यह खराब या क्षतिग्रस्त हो जाता है और प्लाक बनने की शुरुआत होती है।

प्लाक बनने की प्रक्रिया:

  1. क्षतिग्रस्त एंडोथीलियम के कारण LDL कोलेस्ट्रॉल धमनियों की दीवार में घुस जाता है और ऑक्सीडाइज होकर सूजन पैदा करता है।
  2. यह खराब कोलेस्ट्रॉल सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) को आकर्षित करता है और सूजन शुरू होती है।
  3. WBC इस कोलेस्ट्रॉल को निगलते हैं और “फोम सेल” बन जाते हैं।
  4. ये फोम सेल जमा होकर फैटी स्ट्रिक (fatty streak) बनाते हैं — यह अवरोध का शुरुआती चरण है।
  5. शरीर इस क्षेत्र को बचाने के लिए एक मजबूत परत (फाइब्रस कैप) बनाता है, जिससे धमनी संकरी और कठोर हो जाती है। यह प्रक्रिया वर्षों तक बिना लक्षण के चल सकती है।
  6. समय के साथ प्लाक बड़ा होता है और उसकी परत कमजोर होकर फट सकती है, जिससे खून का थक्का बनकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो सकता है।

जोखिम कारक (Risk Factors):

  • अस्वस्थ आहार (सैचुरेटेड और ट्रांस फैट युक्त और नाइट्रेट विहीन)
  • तनाव (Stress) मैनेज न कर पाना
  • धूम्रपान (Smoking)
  • उच्च LDL कोलेस्ट्रॉल
  • उच्च रक्तचाप
  • मधुमेह / इंसुलिन रेजिस्टेंस
  • मोटापा
  • पुरानी सूजन वाली बीमारियां (जैसे गठिया, सोरायसिस आदि)

लक्षण (Symptoms):

यह एक मूक रोग (Silent disease) है — शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं होता।
जब रोग अच्छी तरह बढ़ जाता है, तब :

  • छाती में दर्द (Angina)
  • सांस फूलना
  • मतली
  • हार्ट अटैक या स्ट्रोक

अक्सर इसका पता हार्ट अटैक के बाद ही चलता है।

सामान्य उपचार:

  1. एंजियोप्लास्टी + स्टेंट: एक या सीमित ब्लॉकेज में धमनी खोलने के लिए
  2. बाईपास सर्जरी (CABG): एक वैकल्पिक रक्त मार्ग बनाने के लिए, खासकर कई ब्लॉकेज या मधुमेह में या लेफ्ट मेन आर्टरीमें ब्लॉकेज होने पर

इन उपचारों की उपयोगिता और सीमा :

  • ये ब्लॉकेज बनने के मूल कारणों का कोई उपचार नहीं करते
  • केवल ब्लॉकेज से प्रकट हुए लक्षणों का अस्थायी उपचार करते हैं
  • ब्लॉकेज बनने की प्रक्रिया जारी रहने के कारण कुछ वर्षों बाद समस्या फिर होती है
  • यह उपचार अक्सर ब्लॉकेज के गंभीरतम दुष्परिणाम ( हार्ट अटैक)  के बाद ही किए जाते हैं

एंजियोप्लास्टी और स्टेंट के दुष्प्रभाव:

सामान्य:

  • कैथेटर वाली जगह पर दर्द
  • हल्का खून बहना या सूजन
  • छाती में अस्थायी दर्द
  • जीवनभर दवा की आवश्यकता

जोखिम:

  • स्टेंट में खून का थक्का
  • दोबारा संकुचन
  • धमनी क्षति ग्रस्त
  • अनियमित धड़कन
  • किडनी पर असर
  • एलर्जी
  • रक्तस्राव
  • संक्रमण (कभी कभार )
  • हार्ट अटैक/स्ट्रोक (कभी कभार)

बाईपास सर्जरी (CABG) के दुष्प्रभाव:

सामान्य:

  • छाती में दर्द
  • कमजोरी  और थकान (कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों तक)
  • पैरों में सूजन
  • सांस लेने में कठिनाई
  • नींद और मूड में बदलाव

जोखिम:

  • संक्रमण
  • रक्तस्राव
  • स्ट्रोक या हार्ट अटैक
  • याददाश्त में कमी
  • फेफड़ों और किडनी की समस्या
  • अनियमित धड़कन

सीमाएं:

  • बड़ी सर्जरी
  • लंबा रिकवरी समय (6–12 सप्ताह)
  • रिस्क – फ्री नहीं

रोकथाम और रिवर्सल  (Prevention & Reversal):

सही जीवनशैली से एथेरोस्क्लेरोसिस को रोका जा सकता है और काफी हद तक सुधारा जा सकता है ।

आहार (Diet):

छोड़ें:

  • शराब, तंबाकू, धूम्रपान

बचें:

  • रिफाइंड पदार्थ (चीनी, नमक, मैदा ,रिफाइंड तेल, पालिश किये हुए चावल और दालें)
  • प्रोसेस्ड और पैक्ड फूड , प्रेजर्बेटिव, ऐडेटिव और केमिकल युक्त पदार्थ 
  • तला हुआ भोजन
  • कोल्ड ड्रिंक्स

अपनाएं:

  • नींबू, आंवला, लहसुन
  • साबुत अनाज और मोटे अनाज
  • मौसमी फल
  • हरी सब्जियां और पत्ते वाले साग
  • भीगे हुए मेवे  (बादाम और अखरोट)
  • अलसी, चिया सीड्स
  • देसी घी (शारीरिक गतिविधियों के अनुपात में संतुलित मात्रा में)

जीवनशैली:

  • रोज 8,000–10,000 कदम चलें
  • व्यायाम,योग, प्राणायाम, ध्यान करें
  • 6–8 घंटे नींद लें
  • तनाव नियंत्रित करें

दवाओं की आवश्यकता:

  • रोकथाम के लिए दवा जरूरी नहीं
  • हल्के ब्लॉकेज में भी जीवनशैली पर्याप्त
  • गंभीर मामलों में कुछ समय अस्थायी दवा
  • सुधार के बाद दवा बंद की आवश्यकता नहीं

दवाओं के विकल्प:

आप अपनी पसंद से एलोपैथिक , होम्योपैथिक , या आयुर्वेदिक दवाओं  का उपयोग कर सकते हैं। एलोपैथी के साइड इफेक्ट्स होने के कारण हम होमियोपैथी या आयुर्वेद की संस्तुति करते हैं जो सामान रूप से प्रभावकारी हैं और दोनों साथ साथ भी ली जा सकती हैं

अपेक्षित परिणाम: गंभीर ब्लॉकेज में पूर्ण रिवर्सल कठिन हो सकता है  (असंभव नहीं), लेकिन आकार कम करना और प्लाक को स्थिर बनाना निश्चित रूप से संभव है ; इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम कम होता है और रक्त प्रवाह में पर्याप्त सुधार होता है |

विस्तृत विवरण के लिए हमारी वेब साइट www.swasthyabhandar.in पर रोग एवं परामर्श>कुछ बीमारियाँ>हृदय रोग पढ़ें |

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